29 सितंबर 2027 को सिलचर का चौघड़िया

बुधवार, 29 सितंबर 2027, सिलचर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 29 सितंबर 2027 को सिलचर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (10:55 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (06:06 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:09 पर और सूर्यास्त 17:08 पर है। राहुकाल 11:09 से 12:38 तक है।

दिन और रात
दिन 05:09 – 17:08
रात 05:10 तक
तिथि
चतुर्दशी, 10:55 तक
अमावस्या
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 04:00 तक
हस्त
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:09 – 06:39शुभ
अमृत06:39 – 08:09शुभ
काल08:09 – 09:39टालें
शुभ09:39 – 11:09शुभ
रोग11:09 – 12:38टालें
उद्वेग12:38 – 14:08टालें
चर14:08 – 15:38सामान्य
लाभ15:38 – 17:08शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:08 – 18:38टालें
शुभ18:38 – 20:08शुभ
अमृत20:08 – 21:39शुभ
चर21:39 – 23:09सामान्य
रोग23:09 – 00:39टालें
काल00:39 – 02:09टालें
लाभ02:09 – 03:39शुभ
उद्वेग03:39 – 05:10टालें

29 सितंबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 10:55 तक
अमावस्या 08:06, 30 सित॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 04:00, 30 सित॰ तक
हस्त 02:11, 1 अक्टू॰ तक
योग
शुक्ल 00:26, 30 सित॰ तक
ब्रह्म 21:09, 30 सित॰ तक
करण
शकुनि 10:55 तक
चतुष्पद 21:29 तक
नाग 08:06, 30 सित॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 11:34 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:09
सूर्यास्त
17:08
चंद्रोदय
04:04
चंद्रास्त
16:25
दिनमान
11h 59m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:33 – 04:21
अभिजीत मुहूर्त
10:45 – 11:33 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:09 – 12:38
यमगंड
06:39 – 08:09
गुलिक काल
09:39 – 11:09

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:0906:09दिन
चंद्र06:0907:09दिन
शनि07:0908:09दिन
गुरु08:0909:09दिन
मंगल09:0910:09दिन
सूर्य10:0911:09दिन
शुक्र11:0912:08दिन
बुध12:0813:08दिन
चंद्र13:0814:08दिन
शनि14:0815:08दिन
गुरु15:0816:08दिन
मंगल16:0817:08दिन
सूर्य17:0818:08रात
शुक्र18:0819:08रात
बुध19:0820:08रात
चंद्र20:0821:08रात
शनि21:0822:09रात
गुरु22:0923:09रात
मंगल23:0900:09रात
सूर्य00:0901:09रात
शुक्र01:0902:09रात
बुध02:0903:09रात
चंद्र03:0904:10रात
शनि04:1005:10रात

अयनांश 24.2446° (लाहिड़ी)। समय सिलचर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।