25 अक्टूबर 2027 को सिलचर का चौघड़िया

सोमवार, 25 अक्टूबर 2027, सिलचर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 25 अक्टूबर 2027 को सिलचर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (05:40 तक), नक्षत्र मघा (16:09 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:21 पर और सूर्यास्त 16:43 पर है। राहुकाल 06:46 से 08:12 तक है।

दिन और रात
दिन 05:21 – 16:43
रात 05:22 तक
तिथि
एकादशी, 03:22 तक
द्वादशी
नक्षत्र
मघा, 16:09 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:21 – 06:46शुभ
काल06:46 – 08:12टालें
शुभ08:12 – 09:37शुभ
रोग09:37 – 11:02टालें
उद्वेग11:02 – 12:28टालें
चर12:28 – 13:53सामान्य
लाभ13:53 – 15:18शुभ
अमृत15:18 – 16:43शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर16:43 – 18:18सामान्य
रोग18:18 – 19:53टालें
काल19:53 – 21:28टालें
लाभ21:28 – 23:03शुभ
उद्वेग23:03 – 00:37टालें
शुभ00:37 – 02:12शुभ
अमृत02:12 – 03:47शुभ
चर03:47 – 05:22सामान्य

25 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण दशमी 05:40 तक
कृष्ण एकादशी 03:22, 26 अक्टू॰ तक
कृष्ण द्वादशी 01:04, 27 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मघा 16:09 तक
पूर्वा फाल्गुनी 14:34, 26 अक्टू॰ तक
योग
शुक्ल 14:47 तक
ब्रह्म 11:44, 26 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 05:40 तक
बव 16:32 तक
बालव 03:22, 26 अक्टू॰ तक
कौलव 14:13, 26 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:21
सूर्यास्त
16:43
चंद्रोदय
00:48
चंद्रास्त
13:45
दिनमान
11h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:40 – 04:31
अभिजीत मुहूर्त
10:40 – 11:25

अशुभ समय

राहुकाल
06:46 – 08:12
यमगंड
09:37 – 11:02
गुलिक काल
12:28 – 13:53

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:2106:18दिन
शनि06:1807:15दिन
गुरु07:1508:12दिन
मंगल08:1209:09दिन
सूर्य09:0910:05दिन
शुक्र10:0511:02दिन
बुध11:0211:59दिन
चंद्र11:5912:56दिन
शनि12:5613:53दिन
गुरु13:5314:50दिन
मंगल14:5015:47दिन
सूर्य15:4716:43दिन
शुक्र16:4317:47रात
बुध17:4718:50रात
चंद्र18:5019:53रात
शनि19:5320:56रात
गुरु20:5621:59रात
मंगल21:5923:03रात
सूर्य23:0300:06रात
शुक्र00:0601:09रात
बुध01:0902:12रात
चंद्र02:1203:15रात
शनि03:1504:19रात
गुरु04:1905:22रात

अयनांश 24.2456° (लाहिड़ी)। समय सिलचर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।