14 नवंबर 2027 को सिलचर का चौघड़िया

रविवार, 14 नवंबर 2027, सिलचर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 14 नवंबर 2027 को सिलचर में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (08:55 तक), नक्षत्र भरणी (07:52 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:34 पर और सूर्यास्त 16:32 पर है। राहुकाल 15:09 से 16:32 तक है।

दिन और रात
दिन 05:34 – 16:32
रात 05:34 तक
तिथि
पूर्णिमा, 08:55 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
कृत्तिका
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:34 – 06:56टालें
चर06:56 – 08:18सामान्य
लाभ08:18 – 09:40शुभ
अमृत09:40 – 11:03शुभ
काल11:03 – 12:25टालें
शुभ12:25 – 13:47शुभ
रोग13:47 – 15:09टालें
उद्वेग15:09 – 16:32टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ16:32 – 18:09शुभ
अमृत18:09 – 19:47शुभ
चर19:47 – 21:25सामान्य
रोग21:25 – 23:03टालें
काल23:03 – 00:41टालें
लाभ00:41 – 02:19शुभ
उद्वेग02:19 – 03:56टालें
शुभ03:56 – 05:34शुभ

14 नवंबर 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
पूर्णिमा 08:55 तक
कृष्ण प्रतिपदा 07:28, 15 नव॰ तक
नक्षत्र
भरणी 07:52 तक
कृत्तिका 07:06, 15 नव॰ तक
योग
वरीयान 17:49 तक
परिघअशुभ 15:21, 15 नव॰ तक
करण
बव 08:55 तक
बालव 20:15 तक
कौलव 07:28, 15 नव॰ तक
चंद्र राशि
मेष 13:42 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:34
सूर्यास्त
16:32
चंद्रोदय
16:28
चंद्रास्त
05:33
दिनमान
10h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:49 – 04:41
अभिजीत मुहूर्त
10:41 – 11:24

अशुभ समय

राहुकाल
15:09 – 16:32
यमगंड
11:03 – 12:25
गुलिक काल
13:47 – 15:09

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:3406:28दिन
शुक्र06:2807:23दिन
बुध07:2308:18दिन
चंद्र08:1809:13दिन
शनि09:1310:08दिन
गुरु10:0811:03दिन
मंगल11:0311:57दिन
सूर्य11:5712:52दिन
शुक्र12:5213:47दिन
बुध13:4714:42दिन
चंद्र14:4215:37दिन
शनि15:3716:32दिन
गुरु16:3217:37रात
मंगल17:3718:42रात
सूर्य18:4219:47रात
शुक्र19:4720:52रात
बुध20:5221:58रात
चंद्र21:5823:03रात
शनि23:0300:08रात
गुरु00:0801:13रात
मंगल01:1302:19रात
सूर्य02:1903:24रात
शुक्र03:2404:29रात
बुध04:2905:34रात

अयनांश 24.2464° (लाहिड़ी)। समय सिलचर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।