3 मार्च 2025 को वाराणसी का चौघड़िया

सोमवार, 3 मार्च 2025, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 3 मार्च 2025 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (18:02 तक), नक्षत्र रेवती (06:39 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:19 पर और सूर्यास्त 18:01 पर है। राहुकाल 07:46 से 09:14 तक है।

दिन और रात
दिन 06:19 – 18:01
रात 06:18 तक
तिथि
चतुर्थी, 18:02 तक
पंचमी
नक्षत्र
अश्विनी, 04:29 तक
भरणी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:19 – 07:46शुभ
काल07:46 – 09:14टालें
शुभ09:14 – 10:42शुभ
रोग10:42 – 12:10टालें
उद्वेग12:10 – 13:37टालें
चर13:37 – 15:05सामान्य
लाभ15:05 – 16:33शुभ
अमृत16:33 – 18:01शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:01 – 19:33सामान्य
रोग19:33 – 21:05टालें
काल21:05 – 22:37टालें
लाभ22:37 – 00:09शुभ
उद्वेग00:09 – 01:41टालें
शुभ01:41 – 03:14शुभ
अमृत03:14 – 04:46शुभ
चर04:46 – 06:18सामान्य

3 मार्च 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 18:02 तक
शुक्ल पंचमी 15:17, 4 मार्च तक
नक्षत्र
रेवती 06:39 तक
अश्विनी 04:29, 4 मार्च तक
भरणी 02:37, 5 मार्च तक
योग
शुक्ल 08:57 तक
ब्रह्म 05:24, 4 मार्च तक
इंद्र 02:06, 5 मार्च तक
करण
वणिज 07:31 तक
विष्टि (भद्रा) 18:02 तक
बव 04:37, 4 मार्च तक
बालव 15:17, 4 मार्च तक
चंद्र राशि
मीन 06:39 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:19
सूर्यास्त
18:01
चंद्रोदय
08:20
चंद्रास्त
21:41
दिनमान
11h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:40 – 05:30
अभिजीत मुहूर्त
11:46 – 12:33

अशुभ समय

राहुकाल
07:46 – 09:14
यमगंड
10:42 – 12:10
गुलिक काल
13:37 – 15:05

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:1907:17दिन
शनि07:1708:16दिन
गुरु08:1609:14दिन
मंगल09:1410:13दिन
सूर्य10:1311:11दिन
शुक्र11:1112:10दिन
बुध12:1013:08दिन
चंद्र13:0814:07दिन
शनि14:0715:05दिन
गुरु15:0516:04दिन
मंगल16:0417:02दिन
सूर्य17:0218:01दिन
शुक्र18:0119:02रात
बुध19:0220:03रात
चंद्र20:0321:05रात
शनि21:0522:06रात
गुरु22:0623:08रात
मंगल23:0800:09रात
सूर्य00:0901:11रात
शुक्र01:1102:12रात
बुध02:1203:14रात
चंद्र03:1404:15रात
शनि04:1505:16रात
गुरु05:1606:18रात

अयनांश 24.2086° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।