20 मई 2025 को वाराणसी का चौघड़िया

मंगलवार, 20 मई 2025, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 20 मई 2025 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (05:52 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (19:32 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 05:11 पर और सूर्यास्त 18:38 पर है। राहुकाल 15:16 से 16:57 तक है।

दिन और रात
दिन 05:11 – 18:38
रात 05:10 तक
तिथि
अष्टमी, 04:55 तक
नक्षत्र
धनिष्ठा, 19:32 तक
शतभिषा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 मई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:11 – 06:51टालें
उद्वेग06:51 – 08:32टालें
चर08:32 – 10:13सामान्य
लाभ10:13 – 11:54शुभ
अमृत11:54 – 13:35शुभ
काल13:35 – 15:16टालें
शुभ15:16 – 16:57शुभ
रोग16:57 – 18:38टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:38 – 19:57टालें
लाभ19:57 – 21:16शुभ
उद्वेग21:16 – 22:35टालें
शुभ22:35 – 23:54शुभ
अमृत23:54 – 01:13शुभ
चर01:13 – 02:32सामान्य
रोग02:32 – 03:51टालें
काल03:51 – 05:10टालें

20 मई 2025 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 05:52 तक
कृष्ण अष्टमी 04:55, 21 मई तक
कृष्ण नवमी 03:22, 22 मई तक
नक्षत्र
शतभिषा 18:58, 21 मई तक
योग
इंद्र 02:50, 21 मई तक
वैधृतिअशुभ 00:34, 22 मई तक
करण
बव 05:52 तक
बालव 17:28 तक
कौलव 04:55, 21 मई तक
तैतिल 16:13, 21 मई तक
चंद्र राशि
मकर 07:35 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:11
सूर्यास्त
18:38
चंद्रोदय
00:16
चंद्रास्त
11:33
दिनमान
13h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:46 – 04:28
अभिजीत मुहूर्त
11:27 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
15:16 – 16:57
यमगंड
08:32 – 10:13
गुलिक काल
11:54 – 13:35

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:1106:18दिन
सूर्य06:1807:25दिन
शुक्र07:2508:32दिन
बुध08:3209:40दिन
चंद्र09:4010:47दिन
शनि10:4711:54दिन
गुरु11:5413:02दिन
मंगल13:0214:09दिन
सूर्य14:0915:16दिन
शुक्र15:1616:23दिन
बुध16:2317:31दिन
चंद्र17:3118:38दिन
शनि18:3819:31रात
गुरु19:3120:23रात
मंगल20:2321:16रात
सूर्य21:1622:09रात
शुक्र22:0923:01रात
बुध23:0123:54रात
चंद्र23:5400:47रात
शनि00:4701:39रात
गुरु01:3902:32रात
मंगल02:3203:25रात
सूर्य03:2504:17रात
शुक्र04:1705:10रात

अयनांश 24.2116° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।