8 मार्च 2026 को वाराणसी का चौघड़िया

रविवार, 8 मार्च 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 8 मार्च 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (21:11 तक), नक्षत्र स्वाति (13:31 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 06:14 पर और सूर्यास्त 18:03 पर है। राहुकाल 16:34 से 18:03 तक है।

दिन और रात
दिन 06:14 – 18:03
रात 06:13 तक
तिथि
पंचमी, 21:11 तक
षष्ठी
नक्षत्र
स्वाति, 13:31 तक
विशाखा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:14 – 07:43टालें
चर07:43 – 09:11सामान्य
लाभ09:11 – 10:40शुभ
अमृत10:40 – 12:09शुभ
काल12:09 – 13:37टालें
शुभ13:37 – 15:06शुभ
रोग15:06 – 16:34टालें
उद्वेग16:34 – 18:03टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:03 – 19:34शुभ
अमृत19:34 – 21:06शुभ
चर21:06 – 22:37सामान्य
रोग22:37 – 00:08टालें
काल00:08 – 01:39टालें
लाभ01:39 – 03:11शुभ
उद्वेग03:11 – 04:42टालें
शुभ04:42 – 06:13शुभ

8 मार्च 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 21:11 तक
कृष्ण षष्ठी 23:27, 9 मार्च तक
नक्षत्र
स्वाति 13:31 तक
विशाखा 16:11, 9 मार्च तक
योग
ध्रुव 07:04 तक
व्याघातअशुभ 07:35, 9 मार्च तक
करण
कौलव 08:11 तक
तैतिल 21:11 तक
गर 10:17, 9 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:14
सूर्यास्त
18:03
चंद्रोदय
22:36
चंद्रास्त
08:46
दिनमान
11h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:37 – 05:25
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:32

अशुभ समय

राहुकाल
16:34 – 18:03
यमगंड
12:09 – 13:37
गुलिक काल
15:06 – 16:34

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:1407:13दिन
शुक्र07:1308:12दिन
बुध08:1209:11दिन
चंद्र09:1110:10दिन
शनि10:1011:10दिन
गुरु11:1012:09दिन
मंगल12:0913:08दिन
सूर्य13:0814:07दिन
शुक्र14:0715:06दिन
बुध15:0616:05दिन
चंद्र16:0517:04दिन
शनि17:0418:03दिन
गुरु18:0319:04रात
मंगल19:0420:05रात
सूर्य20:0521:06रात
शुक्र21:0622:06रात
बुध22:0623:07रात
चंद्र23:0700:08रात
शनि00:0801:09रात
गुरु01:0902:10रात
मंगल02:1003:11रात
सूर्य03:1104:11रात
शुक्र04:1105:12रात
बुध05:1206:13रात

अयनांश 24.2228° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।