10 मार्च 2026 को वाराणसी का चौघड़िया

मंगलवार, 10 मार्च 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 10 मार्च 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (01:54, 11 मार्च तक), नक्षत्र अनुराधा (19:05 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 06:12 पर और सूर्यास्त 18:04 पर है। राहुकाल 15:06 से 16:35 तक है।

दिन और रात
दिन 06:12 – 18:04
रात 06:11 तक
तिथि
सप्तमी, 01:54 तक
अष्टमी
नक्षत्र
अनुराधा, 19:05 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:12 – 07:41टालें
उद्वेग07:41 – 09:10टालें
चर09:10 – 10:39सामान्य
लाभ10:39 – 12:08शुभ
अमृत12:08 – 13:37शुभ
काल13:37 – 15:06टालें
शुभ15:06 – 16:35शुभ
रोग16:35 – 18:04टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:04 – 19:35टालें
लाभ19:35 – 21:06शुभ
उद्वेग21:06 – 22:37टालें
शुभ22:37 – 00:08शुभ
अमृत00:08 – 01:38शुभ
चर01:38 – 03:09सामान्य
रोग03:09 – 04:40टालें
काल04:40 – 06:11टालें

10 मार्च 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 01:54, 11 मार्च तक
कृष्ण अष्टमी 04:19, 12 मार्च तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 22:00, 11 मार्च तक
योग
हर्षण 08:21 तक
वज्रअशुभ 09:12, 11 मार्च तक
करण
विष्टि (भद्रा) 12:40 तक
बव 01:54, 11 मार्च तक
बालव 15:08, 11 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:12
सूर्यास्त
18:04
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
10:05
दिनमान
11h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:35 – 05:24
अभिजीत मुहूर्त
11:44 – 12:32

अशुभ समय

राहुकाल
15:06 – 16:35
यमगंड
09:10 – 10:39
गुलिक काल
12:08 – 13:37

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:1207:11दिन
सूर्य07:1108:11दिन
शुक्र08:1109:10दिन
बुध09:1010:09दिन
चंद्र10:0911:09दिन
शनि11:0912:08दिन
गुरु12:0813:07दिन
मंगल13:0714:07दिन
सूर्य14:0715:06दिन
शुक्र15:0616:05दिन
बुध16:0517:05दिन
चंद्र17:0518:04दिन
शनि18:0419:05रात
गुरु19:0520:05रात
मंगल20:0521:06रात
सूर्य21:0622:06रात
शुक्र22:0623:07रात
बुध23:0700:08रात
चंद्र00:0801:08रात
शनि01:0802:09रात
गुरु02:0903:09रात
मंगल03:0904:10रात
सूर्य04:1005:11रात
शुक्र05:1106:11रात

अयनांश 24.2229° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।