26 जून 2026 को वाराणसी का चौघड़िया

शुक्रवार, 26 जून 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 26 जून 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (22:22 तक), नक्षत्र विशाखा (19:16 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 05:09 पर और सूर्यास्त 18:52 पर है। राहुकाल 10:18 से 12:00 तक है।

दिन और रात
दिन 05:09 – 18:52
रात 05:09 तक
तिथि
द्वादशी, 22:22 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
विशाखा, 19:16 तक
अनुराधा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 जून 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:09 – 06:52सामान्य
लाभ06:52 – 08:35शुभ
अमृत08:35 – 10:18शुभ
काल10:18 – 12:00टालें
शुभ12:00 – 13:43शुभ
रोग13:43 – 15:26टालें
उद्वेग15:26 – 17:09टालें
चर17:09 – 18:52सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:52 – 20:09टालें
काल20:09 – 21:26टालें
लाभ21:26 – 22:43शुभ
उद्वेग22:43 – 00:01टालें
शुभ00:01 – 01:18शुभ
अमृत01:18 – 02:35शुभ
चर02:35 – 03:52सामान्य
रोग03:52 – 05:09टालें

26 जून 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 22:22 तक
शुक्ल त्रयोदशी 00:43, 28 जून तक
नक्षत्र
विशाखा 19:16 तक
अनुराधा 22:11, 27 जून तक
योग
सिद्ध 11:38 तक
साध्य 12:32, 27 जून तक
करण
बव 09:14 तक
बालव 22:22 तक
कौलव 11:32, 27 जून तक
चंद्र राशि
तुला 12:33 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:09
सूर्यास्त
18:52
चंद्रोदय
15:58
चंद्रास्त
01:57
दिनमान
13h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:47 – 04:28
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:28

अशुभ समय

राहुकाल
10:18 – 12:00
यमगंड
15:26 – 17:09
गुलिक काल
06:52 – 08:35

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:0906:18दिन
बुध06:1807:26दिन
चंद्र07:2608:35दिन
शनि08:3509:43दिन
गुरु09:4310:52दिन
मंगल10:5212:00दिन
सूर्य12:0013:09दिन
शुक्र13:0914:18दिन
बुध14:1815:26दिन
चंद्र15:2616:35दिन
शनि16:3517:43दिन
गुरु17:4318:52दिन
मंगल18:5219:43रात
सूर्य19:4320:35रात
शुक्र20:3521:26रात
बुध21:2622:18रात
चंद्र22:1823:09रात
शनि23:0900:01रात
गुरु00:0100:52रात
मंगल00:5201:44रात
सूर्य01:4402:35रात
शुक्र02:3503:26रात
बुध03:2604:18रात
चंद्र04:1805:09रात

अयनांश 24.2270° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।