15 जुलाई 2026 को वाराणसी का चौघड़िया

बुधवार, 15 जुलाई 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 15 जुलाई 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (11:51 तक), नक्षत्र पुष्य (21:46 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 05:16 पर और सूर्यास्त 18:51 पर है। राहुकाल 12:03 से 13:45 तक है।

दिन और रात
दिन 05:16 – 18:51
रात 05:17 तक
तिथि
प्रतिपदा, 11:51 तक
द्वितीया
नक्षत्र
पुष्य, 21:46 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 जुलाई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:16 – 06:58शुभ
अमृत06:58 – 08:40शुभ
काल08:40 – 10:22टालें
शुभ10:22 – 12:03शुभ
रोग12:03 – 13:45टालें
उद्वेग13:45 – 15:27टालें
चर15:27 – 17:09सामान्य
लाभ17:09 – 18:51शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:51 – 20:09टालें
शुभ20:09 – 21:27शुभ
अमृत21:27 – 22:45शुभ
चर22:45 – 00:04सामान्य
रोग00:04 – 01:22टालें
काल01:22 – 02:40टालें
लाभ02:40 – 03:59शुभ
उद्वेग03:59 – 05:17टालें

15 जुलाई 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 11:51 तक
शुक्ल द्वितीया 08:53, 16 जुल॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 21:46 तक
आश्लेषा 19:52, 16 जुल॰ तक
योग
हर्षण 08:04 तक
वज्रअशुभ 04:30, 16 जुल॰ तक
सिद्धि 01:22, 17 जुल॰ तक
करण
बव 11:51 तक
बालव 22:18 तक
कौलव 08:53, 16 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:16
सूर्यास्त
18:51
चंद्रोदय
05:58
चंद्रास्त
19:52
दिनमान
13h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:53 – 04:35
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:31 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:03 – 13:45
यमगंड
06:58 – 08:40
गुलिक काल
10:22 – 12:03

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:1606:24दिन
चंद्र06:2407:32दिन
शनि07:3208:40दिन
गुरु08:4009:48दिन
मंगल09:4810:56दिन
सूर्य10:5612:03दिन
शुक्र12:0313:11दिन
बुध13:1114:19दिन
चंद्र14:1915:27दिन
शनि15:2716:35दिन
गुरु16:3517:43दिन
मंगल17:4318:51दिन
सूर्य18:5119:43रात
शुक्र19:4320:35रात
बुध20:3521:27रात
चंद्र21:2722:19रात
शनि22:1923:12रात
गुरु23:1200:04रात
मंगल00:0400:56रात
सूर्य00:5601:48रात
शुक्र01:4802:40रात
बुध02:4003:33रात
चंद्र03:3304:25रात
शनि04:2505:17रात

अयनांश 24.2277° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।