16 अगस्त 2026 को वाराणसी का चौघड़िया

रविवार, 16 अगस्त 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 16 अगस्त 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (16:53 तक), नक्षत्र हस्त (03:50, 17 अग॰ तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 05:32 पर और सूर्यास्त 18:32 पर है। राहुकाल 16:54 से 18:32 तक है।

दिन और रात
दिन 05:32 – 18:32
रात 05:32 तक
तिथि
चतुर्थी, 16:53 तक
पंचमी
नक्षत्र
हस्त, 03:50 तक
चित्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 अगस्त 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:32 – 07:09टालें
चर07:09 – 08:47सामान्य
लाभ08:47 – 10:24शुभ
अमृत10:24 – 12:02शुभ
काल12:02 – 13:39टालें
शुभ13:39 – 15:17शुभ
रोग15:17 – 16:54टालें
उद्वेग16:54 – 18:32टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:32 – 19:55शुभ
अमृत19:55 – 21:17शुभ
चर21:17 – 22:40सामान्य
रोग22:40 – 00:02टालें
काल00:02 – 01:24टालें
लाभ01:24 – 02:47शुभ
उद्वेग02:47 – 04:09टालें
शुभ04:09 – 05:32शुभ

16 अगस्त 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 16:53 तक
शुक्ल पंचमी 17:00, 17 अग॰ तक
नक्षत्र
हस्त 03:50, 17 अग॰ तक
चित्रा 04:58, 18 अग॰ तक
योग
साध्य 04:08, 17 अग॰ तक
शुभ 03:29, 18 अग॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 16:53 तक
बव 04:51, 17 अग॰ तक
बालव 17:00, 17 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:32
सूर्यास्त
18:32
चंद्रोदय
08:53
चंद्रास्त
20:45
दिनमान
13h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:04 – 04:48
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:28

अशुभ समय

राहुकाल
16:54 – 18:32
यमगंड
12:02 – 13:39
गुलिक काल
15:17 – 16:54

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:3206:37दिन
शुक्र06:3707:42दिन
बुध07:4208:47दिन
चंद्र08:4709:52दिन
शनि09:5210:57दिन
गुरु10:5712:02दिन
मंगल12:0213:07दिन
सूर्य13:0714:12दिन
शुक्र14:1215:17दिन
बुध15:1716:22दिन
चंद्र16:2217:27दिन
शनि17:2718:32दिन
गुरु18:3219:27रात
मंगल19:2720:22रात
सूर्य20:2221:17रात
शुक्र21:1722:12रात
बुध22:1223:07रात
चंद्र23:0700:02रात
शनि00:0200:57रात
गुरु00:5701:52रात
मंगल01:5202:47रात
सूर्य02:4703:42रात
शुक्र03:4204:37रात
बुध04:3705:32रात

अयनांश 24.2289° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।