24 सितंबर 2026 को वाराणसी का चौघड़िया

गुरुवार, 24 सितंबर 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (23:18 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (10:35 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:47 पर और सूर्यास्त 17:52 पर है। राहुकाल 13:20 से 14:51 तक है।

दिन और रात
दिन 05:47 – 17:52
रात 05:47 तक
तिथि
त्रयोदशी, 23:18 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 10:35 तक
शतभिषा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:47 – 07:18शुभ
रोग07:18 – 08:48टालें
उद्वेग08:48 – 10:19टालें
चर10:19 – 11:50सामान्य
लाभ11:50 – 13:20शुभ
अमृत13:20 – 14:51शुभ
काल14:51 – 16:22टालें
शुभ16:22 – 17:52शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:52 – 19:22शुभ
चर19:22 – 20:51सामान्य
रोग20:51 – 22:20टालें
काल22:20 – 23:50टालें
लाभ23:50 – 01:19शुभ
उद्वेग01:19 – 02:48टालें
शुभ02:48 – 04:18शुभ
अमृत04:18 – 05:47शुभ

24 सितंबर 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 23:18 तक
शुक्ल चतुर्दशी 23:07, 25 सित॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 11:22, 25 सित॰ तक
योग
धृति 15:54 तक
शूलअशुभ 14:51, 25 सित॰ तक
करण
कौलव 11:09 तक
तैतिल 23:18 तक
गर 11:17, 25 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:47
सूर्यास्त
17:52
चंद्रोदय
16:26
चंद्रास्त
03:19
दिनमान
12h 5m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:12 – 04:59
अभिजीत मुहूर्त
11:25 – 12:14

अशुभ समय

राहुकाल
13:20 – 14:51
यमगंड
05:47 – 07:18
गुलिक काल
08:48 – 10:19

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:4706:47दिन
मंगल06:4707:48दिन
सूर्य07:4808:48दिन
शुक्र08:4809:49दिन
बुध09:4910:49दिन
चंद्र10:4911:50दिन
शनि11:5012:50दिन
गुरु12:5013:50दिन
मंगल13:5014:51दिन
सूर्य14:5115:51दिन
शुक्र15:5116:52दिन
बुध16:5217:52दिन
चंद्र17:5218:52रात
शनि18:5219:51रात
गुरु19:5120:51रात
मंगल20:5121:51रात
सूर्य21:5122:50रात
शुक्र22:5023:50रात
बुध23:5000:49रात
चंद्र00:4901:49रात
शनि01:4902:48रात
गुरु02:4803:48रात
मंगल03:4804:48रात
सूर्य04:4805:47रात

अयनांश 24.2304° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।