2 नवंबर 2026 को वाराणसी का चौघड़िया

सोमवार, 2 नवंबर 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 2 नवंबर 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (13:10 तक), नक्षत्र आश्लेषा (03:46, 3 नव॰ तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 06:06 पर और सूर्यास्त 17:16 पर है। राहुकाल 07:30 से 08:53 तक है।

दिन और रात
दिन 06:06 – 17:16
रात 06:06 तक
तिथि
अष्टमी, 13:10 तक
नवमी
नक्षत्र
आश्लेषा, 03:46 तक
मघा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:06 – 07:30शुभ
काल07:30 – 08:53टालें
शुभ08:53 – 10:17शुभ
रोग10:17 – 11:41टालें
उद्वेग11:41 – 13:05टालें
चर13:05 – 14:29सामान्य
लाभ14:29 – 15:52शुभ
अमृत15:52 – 17:16शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:16 – 18:52सामान्य
रोग18:52 – 20:29टालें
काल20:29 – 22:05टालें
लाभ22:05 – 23:41शुभ
उद्वेग23:41 – 01:18टालें
शुभ01:18 – 02:54शुभ
अमृत02:54 – 04:30शुभ
चर04:30 – 06:06सामान्य

2 नवंबर 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 13:10 तक
कृष्ण नवमी 11:55, 3 नव॰ तक
नक्षत्र
आश्लेषा 03:46, 3 नव॰ तक
मघा 03:26, 4 नव॰ तक
योग
शुभ 12:06 तक
शुक्ल 09:54, 3 नव॰ तक
करण
कौलव 13:10 तक
तैतिल 00:29, 3 नव॰ तक
गर 11:55, 3 नव॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 03:46, 3 नव॰ तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:06
सूर्यास्त
17:16
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
12:58
दिनमान
11h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:23 – 05:15
अभिजीत मुहूर्त
11:19 – 12:03

अशुभ समय

राहुकाल
07:30 – 08:53
यमगंड
10:17 – 11:41
गुलिक काल
13:05 – 14:29

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:0607:02दिन
शनि07:0207:58दिन
गुरु07:5808:53दिन
मंगल08:5309:49दिन
सूर्य09:4910:45दिन
शुक्र10:4511:41दिन
बुध11:4112:37दिन
चंद्र12:3713:33दिन
शनि13:3314:29दिन
गुरु14:2915:24दिन
मंगल15:2416:20दिन
सूर्य16:2017:16दिन
शुक्र17:1618:20रात
बुध18:2019:25रात
चंद्र19:2520:29रात
शनि20:2921:33रात
गुरु21:3322:37रात
मंगल22:3723:41रात
सूर्य23:4100:46रात
शुक्र00:4601:50रात
बुध01:5002:54रात
चंद्र02:5403:58रात
शनि03:5805:02रात
गुरु05:0206:06रात

अयनांश 24.2319° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।