13 मई 2027 को वाराणसी का चौघड़िया

गुरुवार, 13 मई 2027, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 13 मई 2027 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (21:18 तक), नक्षत्र आश्लेषा (13:41 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 05:14 पर और सूर्यास्त 18:34 पर है। राहुकाल 13:34 से 15:14 तक है।

दिन और रात
दिन 05:14 – 18:34
रात 05:14 तक
तिथि
अष्टमी, 21:18 तक
नवमी
नक्षत्र
आश्लेषा, 13:41 तक
मघा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 मई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:14 – 06:54शुभ
रोग06:54 – 08:34टालें
उद्वेग08:34 – 10:14टालें
चर10:14 – 11:54सामान्य
लाभ11:54 – 13:34शुभ
अमृत13:34 – 15:14शुभ
काल15:14 – 16:54टालें
शुभ16:54 – 18:34शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:34 – 19:54शुभ
चर19:54 – 21:14सामान्य
रोग21:14 – 22:34टालें
काल22:34 – 23:54टालें
लाभ23:54 – 01:14शुभ
उद्वेग01:14 – 02:34टालें
शुभ02:34 – 03:54शुभ
अमृत03:54 – 05:14शुभ

13 मई 2027 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 21:18 तक
शुक्ल नवमी 19:39, 14 मई तक
नक्षत्र
मघा 12:42, 14 मई तक
योग
वृद्धि 11:20 तक
ध्रुव 08:50, 14 मई तक
करण
विष्टि (भद्रा) 10:13 तक
बव 21:18 तक
बालव 08:26, 14 मई तक
चंद्र राशि
कर्क 13:41 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:14
सूर्यास्त
18:34
चंद्रोदय
11:51
चंद्रास्त
00:22
दिनमान
13h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:49 – 04:31
अभिजीत मुहूर्त
11:27 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
13:34 – 15:14
यमगंड
05:14 – 06:54
गुलिक काल
08:34 – 10:14

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:1406:21दिन
मंगल06:2107:27दिन
सूर्य07:2708:34दिन
शुक्र08:3409:41दिन
बुध09:4110:47दिन
चंद्र10:4711:54दिन
शनि11:5413:01दिन
गुरु13:0114:07दिन
मंगल14:0715:14दिन
सूर्य15:1416:21दिन
शुक्र16:2117:27दिन
बुध17:2718:34दिन
चंद्र18:3419:27रात
शनि19:2720:21रात
गुरु20:2121:14रात
मंगल21:1422:07रात
सूर्य22:0723:01रात
शुक्र23:0123:54रात
बुध23:5400:47रात
चंद्र00:4701:40रात
शनि01:4002:34रात
गुरु02:3403:27रात
मंगल03:2704:20रात
सूर्य04:2005:14रात

अयनांश 24.2393° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।