19 मई 2027 को वाराणसी का चौघड़िया

बुधवार, 19 मई 2027, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 19 मई 2027 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (16:03 तक), नक्षत्र स्वाति (12:19 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:11 पर और सूर्यास्त 18:37 पर है। राहुकाल 11:54 से 13:35 तक है।

दिन और रात
दिन 05:11 – 18:37
रात 05:11 तक
तिथि
चतुर्दशी, 16:03 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
स्वाति, 12:19 तक
विशाखा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 मई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:11 – 06:52शुभ
अमृत06:52 – 08:33शुभ
काल08:33 – 10:13टालें
शुभ10:13 – 11:54शुभ
रोग11:54 – 13:35टालें
उद्वेग13:35 – 15:16टालें
चर15:16 – 16:56सामान्य
लाभ16:56 – 18:37शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:37 – 19:56टालें
शुभ19:56 – 21:16शुभ
अमृत21:16 – 22:35शुभ
चर22:35 – 23:54सामान्य
रोग23:54 – 01:13टालें
काल01:13 – 02:32टालें
लाभ02:32 – 03:52शुभ
उद्वेग03:52 – 05:11टालें

19 मई 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 16:03 तक
पूर्णिमा 16:29, 20 मई तक
नक्षत्र
स्वाति 12:19 तक
विशाखा 13:21, 20 मई तक
योग
वरीयान 23:00 तक
परिघअशुभ 22:26, 20 मई तक
करण
वणिज 16:03 तक
विष्टि (भद्रा) 04:12, 20 मई तक
बव 16:29, 20 मई तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:11
सूर्यास्त
18:37
चंद्रोदय
17:47
चंद्रास्त
03:56
दिनमान
13h 26m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:47 – 04:29
अभिजीत मुहूर्त
11:27 – 12:21 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:54 – 13:35
यमगंड
06:52 – 08:33
गुलिक काल
10:13 – 11:54

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:1106:18दिन
चंद्र06:1807:26दिन
शनि07:2608:33दिन
गुरु08:3309:40दिन
मंगल09:4010:47दिन
सूर्य10:4711:54दिन
शुक्र11:5413:01दिन
बुध13:0114:09दिन
चंद्र14:0915:16दिन
शनि15:1616:23दिन
गुरु16:2317:30दिन
मंगल17:3018:37दिन
सूर्य18:3719:30रात
शुक्र19:3020:23रात
बुध20:2321:16रात
चंद्र21:1622:08रात
शनि22:0823:01रात
गुरु23:0123:54रात
मंगल23:5400:47रात
सूर्य00:4701:40रात
शुक्र01:4002:32रात
बुध02:3203:25रात
चंद्र03:2504:18रात
शनि04:1805:11रात

अयनांश 24.2395° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।