15 जून 2027 को वाराणसी का चौघड़िया

मंगलवार, 15 जून 2027, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 15 जून 2027 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (02:31, 16 जून तक), नक्षत्र स्वाति (18:23 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:07 पर और सूर्यास्त 18:49 पर है। राहुकाल 15:24 से 17:06 तक है।

दिन और रात
दिन 05:07 – 18:49
रात 05:07 तक
तिथि
द्वादशी, 02:31 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
स्वाति, 18:23 तक
विशाखा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 जून 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:07 – 06:50टालें
उद्वेग06:50 – 08:32टालें
चर08:32 – 10:15सामान्य
लाभ10:15 – 11:58शुभ
अमृत11:58 – 13:41शुभ
काल13:41 – 15:24टालें
शुभ15:24 – 17:06शुभ
रोग17:06 – 18:49टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:49 – 20:06टालें
लाभ20:06 – 21:24शुभ
उद्वेग21:24 – 22:41टालें
शुभ22:41 – 23:58शुभ
अमृत23:58 – 01:15शुभ
चर01:15 – 02:33सामान्य
रोग02:33 – 03:50टालें
काल03:50 – 05:07टालें

15 जून 2027 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 02:31, 16 जून तक
शुक्ल त्रयोदशी 03:20, 17 जून तक
नक्षत्र
स्वाति 18:23 तक
विशाखा 19:44, 16 जून तक
योग
परिघअशुभ 06:46 तक
शिव 06:09, 16 जून तक
करण
बव 14:16 तक
बालव 02:31, 16 जून तक
कौलव 14:52, 16 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:07
सूर्यास्त
18:49
चंद्रोदय
15:40
चंद्रास्त
01:55
दिनमान
13h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:45 – 04:26
अभिजीत मुहूर्त
11:31 – 12:25

अशुभ समय

राहुकाल
15:24 – 17:06
यमगंड
08:32 – 10:15
गुलिक काल
11:58 – 13:41

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:0706:15दिन
सूर्य06:1507:24दिन
शुक्र07:2408:32दिन
बुध08:3209:41दिन
चंद्र09:4110:50दिन
शनि10:5011:58दिन
गुरु11:5813:07दिन
मंगल13:0714:15दिन
सूर्य14:1515:24दिन
शुक्र15:2416:32दिन
बुध16:3217:41दिन
चंद्र17:4118:49दिन
शनि18:4919:41रात
गुरु19:4120:32रात
मंगल20:3221:24रात
सूर्य21:2422:15रात
शुक्र22:1523:07रात
बुध23:0723:58रात
चंद्र23:5800:50रात
शनि00:5001:41रात
गुरु01:4102:33रात
मंगल02:3303:24रात
सूर्य03:2404:16रात
शुक्र04:1605:07रात

अयनांश 24.2405° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।