31 मार्च 2028 को वाराणसी का चौघड़िया

शुक्रवार, 31 मार्च 2028, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 31 मार्च 2028 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (14:35 तक), नक्षत्र रोहिणी (02:19, 1 अप्रैल तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:50 पर और सूर्यास्त 18:14 पर है। राहुकाल 10:29 से 12:02 तक है।

दिन और रात
दिन 05:50 – 18:14
रात 05:49 तक
तिथि
पंचमी, 14:35 तक
षष्ठी
नक्षत्र
रोहिणी, 02:19 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 मार्च 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:50 – 07:23सामान्य
लाभ07:23 – 08:56शुभ
अमृत08:56 – 10:29शुभ
काल10:29 – 12:02टालें
शुभ12:02 – 13:35शुभ
रोग13:35 – 15:08टालें
उद्वेग15:08 – 16:41टालें
चर16:41 – 18:14सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:14 – 19:41टालें
काल19:41 – 21:08टालें
लाभ21:08 – 22:34शुभ
उद्वेग22:34 – 00:01टालें
शुभ00:01 – 01:28शुभ
अमृत01:28 – 02:55शुभ
चर02:55 – 04:22सामान्य
रोग04:22 – 05:49टालें

31 मार्च 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 14:35 तक
शुक्ल षष्ठी 14:14, 1 अप्रैल तक
नक्षत्र
रोहिणी 02:19, 1 अप्रैल तक
मृगशिरा 02:23, 2 अप्रैल तक
योग
आयुष्मान 01:04, 1 अप्रैल तक
सौभाग्य 23:30, 1 अप्रैल तक
करण
बालव 14:35 तक
कौलव 02:28, 1 अप्रैल तक
तैतिल 14:14, 1 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:50
सूर्यास्त
18:14
चंद्रोदय
08:52
चंद्रास्त
23:09
दिनमान
12h 24m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:17 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
10:29 – 12:02
यमगंड
15:08 – 16:41
गुलिक काल
07:23 – 08:56

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5006:52दिन
बुध06:5207:54दिन
चंद्र07:5408:56दिन
शनि08:5609:58दिन
गुरु09:5811:00दिन
मंगल11:0012:02दिन
सूर्य12:0213:04दिन
शुक्र13:0414:06दिन
बुध14:0615:08दिन
चंद्र15:0816:10दिन
शनि16:1017:12दिन
गुरु17:1218:14दिन
मंगल18:1419:12रात
सूर्य19:1220:10रात
शुक्र20:1021:08रात
बुध21:0822:05रात
चंद्र22:0523:03रात
शनि23:0300:01रात
गुरु00:0100:59रात
मंगल00:5901:57रात
सूर्य01:5702:55रात
शुक्र02:5503:53रात
बुध03:5304:51रात
चंद्र04:5105:49रात

अयनांश 24.2516° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।