22 अक्टूबर 2025 को वृंदावन का चौघड़िया

बुधवार, 22 अक्टूबर 2025, वृंदावन, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 22 अक्टूबर 2025 को वृंदावन में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (20:17 तक), नक्षत्र स्वाति (01:51, 23 अक्टू॰ तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 06:23 पर और सूर्यास्त 17:43 पर है। राहुकाल 12:03 से 13:28 तक है।

दिन और रात
दिन 06:23 – 17:43
रात 06:23 तक
तिथि
प्रतिपदा, 20:17 तक
द्वितीया
नक्षत्र
स्वाति, 01:51 तक
विशाखा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:23 – 07:48शुभ
अमृत07:48 – 09:13शुभ
काल09:13 – 10:38टालें
शुभ10:38 – 12:03शुभ
रोग12:03 – 13:28टालें
उद्वेग13:28 – 14:53टालें
चर14:53 – 16:18सामान्य
लाभ16:18 – 17:43शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:43 – 19:18टालें
शुभ19:18 – 20:53शुभ
अमृत20:53 – 22:28शुभ
चर22:28 – 00:03सामान्य
रोग00:03 – 01:38टालें
काल01:38 – 03:13टालें
लाभ03:13 – 04:48शुभ
उद्वेग04:48 – 06:23टालें

22 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 20:17 तक
शुक्ल द्वितीया 22:47, 23 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 01:51, 23 अक्टू॰ तक
विशाखा 04:51, 24 अक्टू॰ तक
योग
प्रीति 04:05, 23 अक्टू॰ तक
आयुष्मान 04:59, 24 अक्टू॰ तक
करण
किंस्तुघ्न 07:04 तक
बव 20:17 तक
बालव 09:31, 23 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:23
सूर्यास्त
17:43
चंद्रोदय
06:57
चंद्रास्त
17:59
दिनमान
11h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:42 – 05:32
अभिजीत मुहूर्त
11:40 – 12:26 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:03 – 13:28
यमगंड
07:48 – 09:13
गुलिक काल
10:38 – 12:03

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:2307:20दिन
चंद्र07:2008:16दिन
शनि08:1609:13दिन
गुरु09:1310:10दिन
मंगल10:1011:06दिन
सूर्य11:0612:03दिन
शुक्र12:0313:00दिन
बुध13:0013:56दिन
चंद्र13:5614:53दिन
शनि14:5315:50दिन
गुरु15:5016:46दिन
मंगल16:4617:43दिन
सूर्य17:4318:47रात
शुक्र18:4719:50रात
बुध19:5020:53रात
चंद्र20:5321:57रात
शनि21:5723:00रात
गुरु23:0000:03रात
मंगल00:0301:07रात
सूर्य01:0702:10रात
शुक्र02:1003:13रात
बुध03:1304:17रात
चंद्र04:1705:20रात
शनि05:2006:23रात

अयनांश 24.2176° (लाहिड़ी)। समय वृंदावन (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।