12 नवंबर 2025 को वृंदावन का चौघड़िया

बुधवार, 12 नवंबर 2025, वृंदावन, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 12 नवंबर 2025 को वृंदावन में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (22:58 तक), नक्षत्र आश्लेषा (18:35 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:37 पर और सूर्यास्त 17:28 पर है। राहुकाल 12:03 से 13:24 तक है।

दिन और रात
दिन 06:37 – 17:28
रात 06:38 तक
तिथि
अष्टमी, 22:58 तक
नवमी
नक्षत्र
आश्लेषा, 18:35 तक
मघा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:37 – 07:59शुभ
अमृत07:59 – 09:20शुभ
काल09:20 – 10:41टालें
शुभ10:41 – 12:03शुभ
रोग12:03 – 13:24टालें
उद्वेग13:24 – 14:45टालें
चर14:45 – 16:07सामान्य
लाभ16:07 – 17:28शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:28 – 19:07टालें
शुभ19:07 – 20:46शुभ
अमृत20:46 – 22:24शुभ
चर22:24 – 00:03सामान्य
रोग00:03 – 01:42टालें
काल01:42 – 03:21टालें
लाभ03:21 – 04:59शुभ
उद्वेग04:59 – 06:38टालें

12 नवंबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 22:58 तक
कृष्ण नवमी 23:34, 13 नव॰ तक
नक्षत्र
मघा 19:38, 13 नव॰ तक
योग
शुक्ल 08:02 तक
ब्रह्म 06:57, 13 नव॰ तक
करण
बालव 10:58 तक
कौलव 22:58 तक
तैतिल 11:11, 13 नव॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 18:35 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:37
सूर्यास्त
17:28
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
13:04
दिनमान
10h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:52 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
11:41 – 12:24 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:03 – 13:24
यमगंड
07:59 – 09:20
गुलिक काल
10:41 – 12:03

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:3707:31दिन
चंद्र07:3108:26दिन
शनि08:2609:20दिन
गुरु09:2010:14दिन
मंगल10:1411:08दिन
सूर्य11:0812:03दिन
शुक्र12:0312:57दिन
बुध12:5713:51दिन
चंद्र13:5114:45दिन
शनि14:4515:40दिन
गुरु15:4016:34दिन
मंगल16:3417:28दिन
सूर्य17:2818:34रात
शुक्र18:3419:40रात
बुध19:4020:46रात
चंद्र20:4621:51रात
शनि21:5122:57रात
गुरु22:5700:03रात
मंगल00:0301:09रात
सूर्य01:0902:15रात
शुक्र02:1503:21रात
बुध03:2104:26रात
चंद्र04:2605:32रात
शनि05:3206:38रात

अयनांश 24.2184° (लाहिड़ी)। समय वृंदावन (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।