25 फ़रवरी 2026 को वृंदावन का चौघड़िया

बुधवार, 25 फ़रवरी 2026, वृंदावन, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 25 फ़रवरी 2026 को वृंदावन में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (02:41, 26 फ़र॰ तक), नक्षत्र रोहिणी (13:38 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 06:47 पर और सूर्यास्त 18:17 पर है। राहुकाल 12:32 से 13:58 तक है।

दिन और रात
दिन 06:47 – 18:17
रात 06:46 तक
तिथि
नवमी, 02:41 तक
दशमी
नक्षत्र
रोहिणी, 13:38 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 फ़रवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:47 – 08:13शुभ
अमृत08:13 – 09:40शुभ
काल09:40 – 11:06टालें
शुभ11:06 – 12:32शुभ
रोग12:32 – 13:58टालें
उद्वेग13:58 – 15:24टालें
चर15:24 – 16:50सामान्य
लाभ16:50 – 18:17शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:17 – 19:50टालें
शुभ19:50 – 21:24शुभ
अमृत21:24 – 22:58शुभ
चर22:58 – 00:31सामान्य
रोग00:31 – 02:05टालें
काल02:05 – 03:39टालें
लाभ03:39 – 05:13शुभ
उद्वेग05:13 – 06:46टालें

25 फ़रवरी 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल नवमी 02:41, 26 फ़र॰ तक
शुक्ल दशमी 00:33, 27 फ़र॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 13:38 तक
मृगशिरा 12:11, 26 फ़र॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 01:28, 26 फ़र॰ तक
प्रीति 22:33, 26 फ़र॰ तक
करण
बालव 15:46 तक
कौलव 02:41, 26 फ़र॰ तक
तैतिल 13:37, 26 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 00:54, 26 फ़र॰ तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:47
सूर्यास्त
18:17
चंद्रोदय
11:54
चंद्रास्त
01:33
दिनमान
11h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:07 – 05:57
अभिजीत मुहूर्त
12:09 – 12:55 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:32 – 13:58
यमगंड
08:13 – 09:40
गुलिक काल
11:06 – 12:32

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:4707:45दिन
चंद्र07:4508:42दिन
शनि08:4209:40दिन
गुरु09:4010:37दिन
मंगल10:3711:34दिन
सूर्य11:3412:32दिन
शुक्र12:3213:29दिन
बुध13:2914:27दिन
चंद्र14:2715:24दिन
शनि15:2416:22दिन
गुरु16:2217:19दिन
मंगल17:1918:17दिन
सूर्य18:1719:19रात
शुक्र19:1920:22रात
बुध20:2221:24रात
चंद्र21:2422:27रात
शनि22:2723:29रात
गुरु23:2900:31रात
मंगल00:3101:34रात
सूर्य01:3402:36रात
शुक्र02:3603:39रात
बुध03:3904:41रात
चंद्र04:4105:44रात
शनि05:4406:46रात

अयनांश 24.2224° (लाहिड़ी)। समय वृंदावन (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।