13 अक्टूबर 2026 को वारंगल का चौघड़िया

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026, वारंगल, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को वारंगल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (23:28 तक), नक्षत्र विशाखा (01:43, 14 अक्टू॰ तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 06:04 पर और सूर्यास्त 17:51 पर है। राहुकाल 14:54 से 16:22 तक है।

दिन और रात
दिन 06:04 – 17:51
रात 06:04 तक
तिथि
तृतीया, 23:28 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
विशाखा, 01:43 तक
अनुराधा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:04 – 07:32टालें
उद्वेग07:32 – 09:01टालें
चर09:01 – 10:29सामान्य
लाभ10:29 – 11:57शुभ
अमृत11:57 – 13:26शुभ
काल13:26 – 14:54टालें
शुभ14:54 – 16:22शुभ
रोग16:22 – 17:51टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:51 – 19:22टालें
लाभ19:22 – 20:54शुभ
उद्वेग20:54 – 22:26टालें
शुभ22:26 – 23:57शुभ
अमृत23:57 – 01:29शुभ
चर01:29 – 03:01सामान्य
रोग03:01 – 04:33टालें
काल04:33 – 06:04टालें

13 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 23:28 तक
शुक्ल चतुर्थी 01:13, 15 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 01:43, 14 अक्टू॰ तक
अनुराधा 04:03, 15 अक्टू॰ तक
योग
प्रीति 20:23 तक
आयुष्मान 20:39, 14 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 10:46 तक
गर 23:28 तक
वणिज 12:17, 14 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
तुला 19:12 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:04
सूर्यास्त
17:51
चंद्रोदय
08:14
चंद्रास्त
19:32
दिनमान
11h 47m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:26 – 05:15
अभिजीत मुहूर्त
11:34 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
14:54 – 16:22
यमगंड
09:01 – 10:29
गुलिक काल
11:57 – 13:26

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:0407:03दिन
सूर्य07:0308:02दिन
शुक्र08:0209:01दिन
बुध09:0110:00दिन
चंद्र10:0010:58दिन
शनि10:5811:57दिन
गुरु11:5712:56दिन
मंगल12:5613:55दिन
सूर्य13:5514:54दिन
शुक्र14:5415:53दिन
बुध15:5316:52दिन
चंद्र16:5217:51दिन
शनि17:5118:52रात
गुरु18:5219:53रात
मंगल19:5320:54रात
सूर्य20:5421:55रात
शुक्र21:5522:56रात
बुध22:5623:57रात
चंद्र23:5700:59रात
शनि00:5902:00रात
गुरु02:0003:01रात
मंगल03:0104:02रात
सूर्य04:0205:03रात
शुक्र05:0306:04रात

अयनांश 24.2312° (लाहिड़ी)। समय वारंगल (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।