20 जनवरी 2025 को अबू धाबी का पंचांग

सोमवार, 20 जनवरी 2025, अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात। समय Asia/Dubai में है।

सोमवार, 20 जनवरी 2025 को अबू धाबी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (08:29 तक), नक्षत्र हस्त (19:00 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 07:07 पर और सूर्यास्त 17:59 पर है। राहुकाल 08:29 से 09:50 तक है।

दिन और रात
दिन 07:07 – 17:59
रात 07:07 तक
तिथि
सप्तमी
नक्षत्र
हस्त, 19:00 तक
चित्रा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 जनवरी 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 08:29 तक
कृष्ण सप्तमी 11:10, 21 जन॰ तक
नक्षत्र
हस्त 19:00 तक
चित्रा 22:06, 21 जन॰ तक
योग
सुकर्मा 01:22, 21 जन॰ तक
धृति 02:19, 22 जन॰ तक
करण
वणिज 08:29 तक
विष्टि (भद्रा) 21:48 तक
बव 11:10, 21 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:07
सूर्यास्त
17:59
चंद्रोदय
23:49
चंद्रास्त
10:58
दिनमान
10h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:22 – 06:15
अभिजीत मुहूर्त
12:11 – 12:55

अशुभ समय

राहुकाल
08:29 – 09:50
यमगंड
11:12 – 12:33
गुलिक काल
13:54 – 15:16

20 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:07 – 08:29शुभ
काल08:29 – 09:50टालें
शुभ09:50 – 11:12शुभ
रोग11:12 – 12:33टालें
उद्वेग12:33 – 13:54टालें
चर13:54 – 15:16सामान्य
लाभ15:16 – 16:37शुभ
अमृत16:37 – 17:59शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:59 – 19:37सामान्य
रोग19:37 – 21:16टालें
काल21:16 – 22:54टालें
लाभ22:54 – 00:33शुभ
उद्वेग00:33 – 02:11टालें
शुभ02:11 – 03:50शुभ
अमृत03:50 – 05:29शुभ
चर05:29 – 07:07सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:0708:02दिन
शनि08:0208:56दिन
गुरु08:5609:50दिन
मंगल09:5010:44दिन
सूर्य10:4411:39दिन
शुक्र11:3912:33दिन
बुध12:3313:27दिन
चंद्र13:2714:22दिन
शनि14:2215:16दिन
गुरु15:1616:10दिन
मंगल16:1017:05दिन
सूर्य17:0517:59दिन
शुक्र17:5919:05रात
बुध19:0520:10रात
चंद्र20:1021:16रात
शनि21:1622:22रात
गुरु22:2223:27रात
मंगल23:2700:33रात
सूर्य00:3301:39रात
शुक्र01:3902:44रात
बुध02:4403:50रात
चंद्र03:5004:56रात
शनि04:5606:01रात
गुरु06:0107:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
2 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
12 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां अबू धाबी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2070° (लाहिड़ी)। समय अबू धाबी (Asia/Dubai) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।