13 जनवरी 2025 को अटलांटा का पंचांग

सोमवार, 13 जनवरी 2025, अटलांटा, संयुक्त राज्य। समय America/New_York में है।

सोमवार, 13 जनवरी 2025 को अटलांटा में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (17:26 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (23:47 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 07:42 पर और सूर्यास्त 17:50 पर है। राहुकाल 08:58 से 10:14 तक है।

दिन और रात
दिन 07:42 – 17:50
रात 07:42 तक
तिथि
पूर्णिमा, 17:26 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
पुनर्वसु, 23:47 तक
पुष्य
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 जनवरी 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
पूर्णिमा 17:26 तक
कृष्ण प्रतिपदा 16:51, 14 जन॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 23:58, 14 जन॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 18:08 तक
विष्कंभअशुभ 16:28, 14 जन॰ तक
करण
बव 17:26 तक
बालव 05:05, 14 जन॰ तक
कौलव 16:51, 14 जन॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 17:49 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:42
सूर्यास्त
17:50
चंद्रोदय
17:35
चंद्रास्त
07:46
दिनमान
10h 8m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:51 – 06:46
अभिजीत मुहूर्त
12:26 – 13:06

अशुभ समय

राहुकाल
08:58 – 10:14
यमगंड
11:30 – 12:46
गुलिक काल
14:02 – 15:18

13 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:42 – 08:58शुभ
काल08:58 – 10:14टालें
शुभ10:14 – 11:30शुभ
रोग11:30 – 12:46टालें
उद्वेग12:46 – 14:02टालें
चर14:02 – 15:18सामान्य
लाभ15:18 – 16:34शुभ
अमृत16:34 – 17:50शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:50 – 19:34सामान्य
रोग19:34 – 21:18टालें
काल21:18 – 23:02टालें
लाभ23:02 – 00:46शुभ
उद्वेग00:46 – 02:30टालें
शुभ02:30 – 04:14शुभ
अमृत04:14 – 05:58शुभ
चर05:58 – 07:42सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:4208:33दिन
शनि08:3309:23दिन
गुरु09:2310:14दिन
मंगल10:1411:05दिन
सूर्य11:0511:55दिन
शुक्र11:5512:46दिन
बुध12:4613:37दिन
चंद्र13:3714:27दिन
शनि14:2715:18दिन
गुरु15:1816:09दिन
मंगल16:0916:59दिन
सूर्य16:5917:50दिन
शुक्र17:5018:59रात
बुध18:5920:09रात
चंद्र20:0921:18रात
शनि21:1822:27रात
गुरु22:2723:37रात
मंगल23:3700:46रात
सूर्य00:4601:55रात
शुक्र01:5503:05रात
बुध03:0504:14रात
चंद्र04:1405:23रात
शनि05:2306:33रात
गुरु06:3307:42रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 जन॰ 2025पौष पूर्णिमापूर्णिमा
13 जन॰ 2025मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
17 जन॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
1 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां अटलांटा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2068° (लाहिड़ी)। समय अटलांटा (America/New_York) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।