28 अक्टूबर 2025 को अटलांटा का पंचांग

मंगलवार, 28 अक्टूबर 2025, अटलांटा, संयुक्त राज्य। समय America/New_York में है।

मंगलवार, 28 अक्टूबर 2025 को अटलांटा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (23:53 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (08:00, 29 अक्टू॰ तक) और योग धृति है। सूर्योदय 07:53 पर और सूर्यास्त 18:48 पर है। राहुकाल 16:04 से 17:26 तक है।

दिन और रात
दिन 07:53 – 18:48
रात 07:54 तक
तिथि
सप्तमी, 23:53 तक
अष्टमी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 23:53 तक
शुक्ल अष्टमी 00:37, 30 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 08:00, 29 अक्टू॰ तक
योग
धृति 22:21 तक
शूलअशुभ 21:50, 29 अक्टू॰ तक
करण
गर 11:16 तक
वणिज 23:53 तक
विष्टि (भद्रा) 12:20, 29 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
धनु 12:44 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:53
सूर्यास्त
18:48
चंद्रोदय
14:12
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
10h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
06:08 – 07:01
अभिजीत मुहूर्त
12:59 – 13:42

अशुभ समय

राहुकाल
16:04 – 17:26
यमगंड
10:37 – 11:59
गुलिक काल
13:21 – 14:42

28 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग07:53 – 09:15टालें
उद्वेग09:15 – 10:37टालें
चर10:37 – 11:59सामान्य
लाभ11:59 – 13:21शुभ
अमृत13:21 – 14:42शुभ
काल14:42 – 16:04टालें
शुभ16:04 – 17:26शुभ
रोग17:26 – 18:48टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:48 – 20:26टालें
लाभ20:26 – 22:05शुभ
उद्वेग22:05 – 23:43टालें
शुभ23:43 – 01:21शुभ
अमृत01:21 – 02:59शुभ
चर02:59 – 04:37सामान्य
रोग04:37 – 06:16टालें
काल06:16 – 07:54टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल07:5308:48दिन
सूर्य08:4809:42दिन
शुक्र09:4210:37दिन
बुध10:3711:31दिन
चंद्र11:3112:26दिन
शनि12:2613:21दिन
गुरु13:2114:15दिन
मंगल14:1515:10दिन
सूर्य15:1016:04दिन
शुक्र16:0416:59दिन
बुध16:5917:54दिन
चंद्र17:5418:48दिन
शनि18:4819:54रात
गुरु19:5420:59रात
मंगल20:5922:05रात
सूर्य22:0523:10रात
शुक्र23:1000:16रात
बुध00:1601:21रात
चंद्र01:2102:27रात
शनि02:2703:32रात
गुरु03:3204:37रात
मंगल04:3705:43रात
सूर्य05:4306:48रात
शुक्र06:4807:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
8 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां अटलांटा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2178° (लाहिड़ी)। समय अटलांटा (America/New_York) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।