24 सितंबर 2026 को अटलांटा का पंचांग

गुरुवार, 24 सितंबर 2026, अटलांटा, संयुक्त राज्य। समय America/New_York में है।

गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को अटलांटा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (13:48 तक), नक्षत्र शतभिषा (01:52, 25 सित॰ तक) और योग शूल है। सूर्योदय 07:27 पर और सूर्यास्त 19:31 पर है। राहुकाल 14:59 से 16:30 तक है।

दिन और रात
दिन 07:27 – 19:31
रात 07:27 तक
तिथि
त्रयोदशी, 13:48 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
शतभिषा, 01:52 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 सितंबर 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 13:48 तक
शुक्ल चतुर्दशी 13:37, 25 सित॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 01:52, 25 सित॰ तक
पूर्वा भाद्रपद 02:02, 26 सित॰ तक
योग
शूलअशुभ 05:21, 25 सित॰ तक
गंडअशुभ 03:47, 26 सित॰ तक
करण
तैतिल 13:48 तक
गर 01:47, 25 सित॰ तक
वणिज 13:37, 25 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:27
सूर्यास्त
19:31
चंद्रोदय
18:26
चंद्रास्त
05:16
दिनमान
12h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:51 – 06:39
अभिजीत मुहूर्त
13:05 – 13:53

अशुभ समय

राहुकाल
14:59 – 16:30
यमगंड
07:27 – 08:57
गुलिक काल
10:28 – 11:58

24 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:27 – 08:57शुभ
रोग08:57 – 10:28टालें
उद्वेग10:28 – 11:58टालें
चर11:58 – 13:29सामान्य
लाभ13:29 – 14:59शुभ
अमृत14:59 – 16:30शुभ
काल16:30 – 18:00टालें
शुभ18:00 – 19:31शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:31 – 21:00शुभ
चर21:00 – 22:30सामान्य
रोग22:30 – 00:00टालें
काल00:00 – 01:29टालें
लाभ01:29 – 02:59शुभ
उद्वेग02:59 – 04:28टालें
शुभ04:28 – 05:58शुभ
अमृत05:58 – 07:27शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:2708:27दिन
मंगल08:2709:27दिन
सूर्य09:2710:28दिन
शुक्र10:2811:28दिन
बुध11:2812:28दिन
चंद्र12:2813:29दिन
शनि13:2914:29दिन
गुरु14:2915:29दिन
मंगल15:2916:30दिन
सूर्य16:3017:30दिन
शुक्र17:3018:30दिन
बुध18:3019:31दिन
चंद्र19:3120:31रात
शनि20:3121:30रात
गुरु21:3022:30रात
मंगल22:3023:30रात
सूर्य23:3000:29रात
शुक्र00:2901:29रात
बुध01:2902:29रात
चंद्र02:2903:28रात
शनि03:2804:28रात
गुरु04:2805:28रात
मंगल05:2806:28रात
सूर्य06:2807:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 सित॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 सित॰ 2026भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
29 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
21 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां अटलांटा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2305° (लाहिड़ी)। समय अटलांटा (America/New_York) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।