9 अक्टूबर 2026 को अटलांटा का पंचांग

शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026, अटलांटा, संयुक्त राज्य। समय America/New_York में है।

शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को अटलांटा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (12:06 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (11:49 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 07:37 पर और सूर्यास्त 19:11 पर है। राहुकाल 11:57 से 13:24 तक है।

दिन और रात
दिन 07:37 – 19:11
रात 07:38 तक
तिथि
चतुर्दशी, 12:06 तक
अमावस्या
नक्षत्र
हस्त
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 12:06 तक
अमावस्या 11:50, 10 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
हस्त 12:12, 10 अक्टू॰ तक
योग
ब्रह्म 13:51 तक
इंद्र 12:32, 10 अक्टू॰ तक
करण
शकुनि 12:06 तक
चतुष्पद 23:54 तक
नाग 11:50, 10 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:37
सूर्यास्त
19:11
चंद्रोदय
06:34
चंद्रास्त
18:30
दिनमान
11h 33m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:58 – 06:48
अभिजीत मुहूर्त
13:01 – 13:47

अशुभ समय

राहुकाल
11:57 – 13:24
यमगंड
16:17 – 17:44
गुलिक काल
09:04 – 10:31

9 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:37 – 09:04सामान्य
लाभ09:04 – 10:31शुभ
अमृत10:31 – 11:57शुभ
काल11:57 – 13:24टालें
शुभ13:24 – 14:51शुभ
रोग14:51 – 16:17टालें
उद्वेग16:17 – 17:44टालें
चर17:44 – 19:11सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:11 – 20:44टालें
काल20:44 – 22:17टालें
लाभ22:17 – 23:51शुभ
उद्वेग23:51 – 01:24टालें
शुभ01:24 – 02:58शुभ
अमृत02:58 – 04:31शुभ
चर04:31 – 06:05सामान्य
रोग06:05 – 07:38टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:3708:35दिन
बुध08:3509:33दिन
चंद्र09:3310:31दिन
शनि10:3111:28दिन
गुरु11:2812:26दिन
मंगल12:2613:24दिन
सूर्य13:2414:22दिन
शुक्र14:2215:20दिन
बुध15:2016:17दिन
चंद्र16:1717:15दिन
शनि17:1518:13दिन
गुरु18:1319:11दिन
मंगल19:1120:13रात
सूर्य20:1321:15रात
शुक्र21:1522:17रात
बुध22:1723:20रात
चंद्र23:2000:22रात
शनि00:2201:24रात
गुरु01:2402:27रात
मंगल02:2703:29रात
सूर्य03:2904:31रात
शुक्र04:3105:34रात
बुध05:3406:36रात
चंद्र06:3607:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
21 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां अटलांटा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2310° (लाहिड़ी)। समय अटलांटा (America/New_York) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।