21 नवंबर 2026 को अटलांटा का पंचांग

शनिवार, 21 नवंबर 2026, अटलांटा, संयुक्त राज्य। समय America/New_York में है।

शनिवार, 21 नवंबर 2026 को अटलांटा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (18:26 तक), नक्षत्र रेवती (19:25 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 07:15 पर और सूर्यास्त 17:31 पर है। राहुकाल 09:49 से 11:06 तक है।

दिन और रात
दिन 07:15 – 17:31
रात 07:16 तक
तिथि
द्वादशी, 18:26 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
रेवती, 19:25 तक
अश्विनी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 नवंबर 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 18:26 तक
शुक्ल त्रयोदशी 16:07, 22 नव॰ तक
नक्षत्र
रेवती 19:25 तक
अश्विनी 17:45, 22 नव॰ तक
योग
सिद्धि 16:00 तक
व्यतीपातअशुभ 12:59, 22 नव॰ तक
करण
बव 07:20 तक
बालव 18:26 तक
कौलव 05:22, 22 नव॰ तक
तैतिल 16:07, 22 नव॰ तक
चंद्र राशि
मीन 19:25 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:15
सूर्यास्त
17:31
चंद्रोदय
15:15
चंद्रास्त
03:51
दिनमान
10h 16m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:25 – 06:20
अभिजीत मुहूर्त
12:02 – 12:43

अशुभ समय

राहुकाल
09:49 – 11:06
यमगंड
13:40 – 14:57
गुलिक काल
07:15 – 08:32

21 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल07:15 – 08:32टालें
शुभ08:32 – 09:49शुभ
रोग09:49 – 11:06टालें
उद्वेग11:06 – 12:23टालें
चर12:23 – 13:40सामान्य
लाभ13:40 – 14:57शुभ
अमृत14:57 – 16:14शुभ
काल16:14 – 17:31टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:31 – 19:14शुभ
उद्वेग19:14 – 20:57टालें
शुभ20:57 – 22:40शुभ
अमृत22:40 – 00:23शुभ
चर00:23 – 02:06सामान्य
रोग02:06 – 03:49टालें
काल03:49 – 05:33टालें
लाभ05:33 – 07:16शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि07:1508:06दिन
गुरु08:0608:57दिन
मंगल08:5709:49दिन
सूर्य09:4910:40दिन
शुक्र10:4011:31दिन
बुध11:3112:23दिन
चंद्र12:2313:14दिन
शनि13:1414:06दिन
गुरु14:0614:57दिन
मंगल14:5715:48दिन
सूर्य15:4816:40दिन
शुक्र16:4017:31दिन
बुध17:3118:40रात
चंद्र18:4019:48रात
शनि19:4820:57रात
गुरु20:5722:06रात
मंगल22:0623:15रात
सूर्य23:1500:23रात
शुक्र00:2301:32रात
बुध01:3202:41रात
चंद्र02:4103:49रात
शनि03:4904:58रात
गुरु04:5806:07रात
मंगल06:0707:16रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 नव॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 नव॰ 2026कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
27 नव॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 दिस॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
12 दिस॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 दिस॰ 2026धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
20 दिस॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां अटलांटा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2327° (लाहिड़ी)। समय अटलांटा (America/New_York) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।