1 सितंबर 2028 को अटलांटा का पंचांग

शुक्रवार, 1 सितंबर 2028, अटलांटा, संयुक्त राज्य। समय America/New_York में है।

शुक्रवार, 1 सितंबर 2028 को अटलांटा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (15:05 तक), नक्षत्र श्रवण (18:33 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 07:11 पर और सूर्यास्त 20:02 पर है। राहुकाल 12:00 से 13:37 तक है।

दिन और रात
दिन 07:11 – 20:02
रात 07:12 तक
तिथि
त्रयोदशी, 15:05 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
श्रवण, 18:33 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 सितंबर 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 15:05 तक
शुक्ल चतुर्दशी 17:22, 2 सित॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 18:33 तक
धनिष्ठा 21:25, 2 सित॰ तक
योग
शोभन 14:05 तक
अतिगंडअशुभ 14:54, 2 सित॰ तक
करण
तैतिल 15:05 तक
गर 04:12, 2 सित॰ तक
वणिज 17:22, 2 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:11
सूर्यास्त
20:02
चंद्रोदय
18:46
चंद्रास्त
05:00
दिनमान
12h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:42 – 06:27
अभिजीत मुहूर्त
13:11 – 14:02

अशुभ समय

राहुकाल
12:00 – 13:37
यमगंड
16:49 – 18:25
गुलिक काल
08:48 – 10:24

1 सितंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:11 – 08:48सामान्य
लाभ08:48 – 10:24शुभ
अमृत10:24 – 12:00शुभ
काल12:00 – 13:37टालें
शुभ13:37 – 15:13शुभ
रोग15:13 – 16:49टालें
उद्वेग16:49 – 18:25टालें
चर18:25 – 20:02सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग20:02 – 21:26टालें
काल21:26 – 22:49टालें
लाभ22:49 – 00:13शुभ
उद्वेग00:13 – 01:37टालें
शुभ01:37 – 03:01शुभ
अमृत03:01 – 04:24शुभ
चर04:24 – 05:48सामान्य
रोग05:48 – 07:12टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:1108:16दिन
बुध08:1609:20दिन
चंद्र09:2010:24दिन
शनि10:2411:28दिन
गुरु11:2812:32दिन
मंगल12:3213:37दिन
सूर्य13:3714:41दिन
शुक्र14:4115:45दिन
बुध15:4516:49दिन
चंद्र16:4917:53दिन
शनि17:5318:58दिन
गुरु18:5820:02दिन
मंगल20:0220:58रात
सूर्य20:5821:53रात
शुक्र21:5322:49रात
बुध22:4923:45रात
चंद्र23:4500:41रात
शनि00:4101:37रात
गुरु01:3702:33रात
मंगल02:3303:29रात
सूर्य03:2904:24रात
शुक्र04:2405:20रात
बुध05:2006:16रात
चंद्र06:1607:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 सित॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 सित॰ 2028भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
7 सित॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 सित॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 सित॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 सित॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 सित॰ 2028कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2028आश्विन अमावस्याअमावस्या
21 सित॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 सित॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 सित॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां अटलांटा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2575° (लाहिड़ी)। समय अटलांटा (America/New_York) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।