28 सितंबर 2025 को ऑकलैंड का पंचांग

रविवार, 28 सितंबर 2025, ऑकलैंड, न्यूज़ीलैंड। समय Pacific/Auckland में है।

रविवार, 28 सितंबर 2025 को ऑकलैंड में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (21:57 तक), नक्षत्र अनुराधा (08:38 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 07:01 पर और सूर्यास्त 19:22 पर है। राहुकाल 17:49 से 19:22 तक है।

दिन और रात
दिन 07:01 – 19:22
रात 07:00 तक
तिथि
षष्ठी, 21:57 तक
सप्तमी
नक्षत्र
ज्येष्ठा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 सितंबर 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 21:57 तक
शुक्ल सप्तमी 00:02, 30 सित॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 11:25, 29 सित॰ तक
योग
प्रीति 07:15 तक
आयुष्मान 08:02, 29 सित॰ तक
करण
कौलव 08:47 तक
तैतिल 21:57 तक
गर 11:03, 29 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:01
सूर्यास्त
19:22
चंद्रोदय
09:59
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
12h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:28 – 06:15
अभिजीत मुहूर्त
12:47 – 13:36

अशुभ समय

राहुकाल
17:49 – 19:22
यमगंड
13:11 – 14:44
गुलिक काल
16:17 – 17:49

28 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:01 – 08:34टालें
चर08:34 – 10:06सामान्य
लाभ10:06 – 11:39शुभ
अमृत11:39 – 13:11शुभ
काल13:11 – 14:44टालें
शुभ14:44 – 16:17शुभ
रोग16:17 – 17:49टालें
उद्वेग17:49 – 19:22टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:22 – 20:49शुभ
अमृत20:49 – 22:16शुभ
चर22:16 – 23:43सामान्य
रोग23:43 – 01:11टालें
काल01:11 – 02:38टालें
लाभ02:38 – 04:05शुभ
उद्वेग04:05 – 05:33टालें
शुभ05:33 – 07:00शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:0108:03दिन
शुक्र08:0309:05दिन
बुध09:0510:06दिन
चंद्र10:0611:08दिन
शनि11:0812:10दिन
गुरु12:1013:11दिन
मंगल13:1114:13दिन
सूर्य14:1315:15दिन
शुक्र15:1516:17दिन
बुध16:1717:18दिन
चंद्र17:1818:20दिन
शनि18:2019:22दिन
गुरु19:2220:20रात
मंगल20:2021:18रात
सूर्य21:1822:16रात
शुक्र22:1623:14रात
बुध23:1400:13रात
चंद्र00:1301:11रात
शनि01:1102:09रात
गुरु02:0903:07रात
मंगल03:0704:05रात
सूर्य04:0505:03रात
शुक्र05:0306:02रात
बुध06:0207:00रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
26 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां ऑकलैंड में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2166° (लाहिड़ी)। समय ऑकलैंड (Pacific/Auckland) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।