5 अक्टूबर 2026 को ऑकलैंड का पंचांग

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026, ऑकलैंड, न्यूज़ीलैंड। समय Pacific/Auckland में है।

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को ऑकलैंड में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (11:24 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (07:44 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 06:51 पर और सूर्यास्त 19:27 पर है। राहुकाल 08:26 से 10:00 तक है।

दिन और रात
दिन 06:51 – 19:27
रात 06:50 तक
तिथि
नवमी, 11:24 तक
दशमी
नक्षत्र
पुष्य, 06:39 तक
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण नवमी 11:24 तक
कृष्ण दशमी 09:37, 6 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 06:39, 6 अक्टू॰ तक
आश्लेषा 05:47, 7 अक्टू॰ तक
योग
शिव 17:21 तक
सिद्ध 14:50, 6 अक्टू॰ तक
करण
गर 11:24 तक
वणिज 22:29 तक
विष्टि (भद्रा) 09:37, 6 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:51
सूर्यास्त
19:27
चंद्रोदय
03:37
चंद्रास्त
13:28
दिनमान
12h 36m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:20 – 06:06
अभिजीत मुहूर्त
12:44 – 13:35

अशुभ समय

राहुकाल
08:26 – 10:00
यमगंड
11:35 – 13:09
गुलिक काल
14:44 – 16:18

5 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:51 – 08:26शुभ
काल08:26 – 10:00टालें
शुभ10:00 – 11:35शुभ
रोग11:35 – 13:09टालें
उद्वेग13:09 – 14:44टालें
चर14:44 – 16:18सामान्य
लाभ16:18 – 17:53शुभ
अमृत17:53 – 19:27शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:27 – 20:53सामान्य
रोग20:53 – 22:18टालें
काल22:18 – 23:43टालें
लाभ23:43 – 01:09शुभ
उद्वेग01:09 – 02:34टालें
शुभ02:34 – 03:59शुभ
अमृत03:59 – 05:24शुभ
चर05:24 – 06:50सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:5107:54दिन
शनि07:5408:57दिन
गुरु08:5710:00दिन
मंगल10:0011:03दिन
सूर्य11:0312:06दिन
शुक्र12:0613:09दिन
बुध13:0914:12दिन
चंद्र14:1215:15दिन
शनि15:1516:18दिन
गुरु16:1817:21दिन
मंगल17:2118:24दिन
सूर्य18:2419:27दिन
शुक्र19:2720:24रात
बुध20:2421:21रात
चंद्र21:2122:18रात
शनि22:1823:15रात
गुरु23:1500:12रात
मंगल00:1201:09रात
सूर्य01:0902:05रात
शुक्र02:0503:02रात
बुध03:0203:59रात
चंद्र03:5904:56रात
शनि04:5605:53रात
गुरु05:5306:50रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
15 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
18 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां ऑकलैंड में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2308° (लाहिड़ी)। समय ऑकलैंड (Pacific/Auckland) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।