9 जनवरी 2029 को बल्लारी का पंचांग

मंगलवार, 9 जनवरी 2029, बल्लारी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 9 जनवरी 2029 को बल्लारी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (02:20, 10 जन॰ तक), नक्षत्र स्वाति (16:37 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 06:50 पर और सूर्यास्त 18:08 पर है। राहुकाल 15:18 से 16:43 तक है।

दिन और रात
दिन 06:50 – 18:08
रात 06:51 तक
तिथि
दशमी, 02:20 तक
एकादशी
नक्षत्र
स्वाति, 16:37 तक
विशाखा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 जनवरी 2029 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण दशमी 02:20, 10 जन॰ तक
कृष्ण एकादशी 00:56, 11 जन॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 16:37 तक
विशाखा 15:45, 10 जन॰ तक
योग
धृति 18:57 तक
शूलअशुभ 16:31, 10 जन॰ तक
करण
वणिज 15:08 तक
विष्टि (भद्रा) 02:20, 10 जन॰ तक
बव 13:36, 10 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:50
सूर्यास्त
18:08
चंद्रोदय
01:34
चंद्रास्त
13:16
दिनमान
11h 17m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:09 – 05:59
अभिजीत मुहूर्त
12:06 – 12:52

अशुभ समय

राहुकाल
15:18 – 16:43
यमगंड
09:40 – 11:04
गुलिक काल
12:29 – 13:54

9 जनवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:50 – 08:15टालें
उद्वेग08:15 – 09:40टालें
चर09:40 – 11:04सामान्य
लाभ11:04 – 12:29शुभ
अमृत12:29 – 13:54शुभ
काल13:54 – 15:18टालें
शुभ15:18 – 16:43शुभ
रोग16:43 – 18:08टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:08 – 19:43टालें
लाभ19:43 – 21:18शुभ
उद्वेग21:18 – 22:54टालें
शुभ22:54 – 00:29शुभ
अमृत00:29 – 02:04शुभ
चर02:04 – 03:40सामान्य
रोग03:40 – 05:15टालें
काल05:15 – 06:51टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:5007:47दिन
सूर्य07:4708:43दिन
शुक्र08:4309:40दिन
बुध09:4010:36दिन
चंद्र10:3611:33दिन
शनि11:3312:29दिन
गुरु12:2913:25दिन
मंगल13:2514:22दिन
सूर्य14:2215:18दिन
शुक्र15:1816:15दिन
बुध16:1517:11दिन
चंद्र17:1118:08दिन
शनि18:0819:11रात
गुरु19:1120:15रात
मंगल20:1521:18रात
सूर्य21:1822:22रात
शुक्र22:2223:26रात
बुध23:2600:29रात
चंद्र00:2901:33रात
शनि01:3302:36रात
गुरु02:3603:40रात
मंगल03:4004:43रात
सूर्य04:4305:47रात
शुक्र05:4706:51रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 जन॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जन॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जन॰ 2029माघ अमावस्याअमावस्या
14 जन॰ 2029मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 जन॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 जन॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 जन॰ 2029माघ पूर्णिमापूर्णिमा
2 फ़र॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 फ़र॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां बल्लारी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2625° (लाहिड़ी)। समय बल्लारी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।