29 जुलाई 2027 को बेंगलुरु का पंचांग

गुरुवार, 29 जुलाई 2027, बेंगलुरु, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 29 जुलाई 2027 को बेंगलुरु में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (07:34 तक), नक्षत्र रोहिणी (03:28, 30 जुल॰ तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 06:04 पर और सूर्यास्त 18:47 पर है। राहुकाल 14:01 से 15:36 तक है।

दिन और रात
दिन 06:04 – 18:47
रात 06:04 तक
तिथि
एकादशी, 05:13 तक
नक्षत्र
रोहिणी, 03:28 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 जुलाई 2027 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण दशमी 07:34 तक
कृष्ण एकादशी 05:13, 30 जुल॰ तक
कृष्ण द्वादशी 02:18, 31 जुल॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 03:28, 30 जुल॰ तक
मृगशिरा 01:24, 31 जुल॰ तक
योग
वृद्धि 13:20 तक
ध्रुव 10:14, 30 जुल॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 07:34 तक
बव 18:28 तक
बालव 05:13, 30 जुल॰ तक
कौलव 15:49, 30 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:04
सूर्यास्त
18:47
चंद्रोदय
01:26
चंद्रास्त
14:48
दिनमान
12h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:34 – 05:19
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:51

अशुभ समय

राहुकाल
14:01 – 15:36
यमगंड
06:04 – 07:39
गुलिक काल
09:15 – 10:50

29 जुलाई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:04 – 07:39शुभ
रोग07:39 – 09:15टालें
उद्वेग09:15 – 10:50टालें
चर10:50 – 12:26सामान्य
लाभ12:26 – 14:01शुभ
अमृत14:01 – 15:36शुभ
काल15:36 – 17:12टालें
शुभ17:12 – 18:47शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:47 – 20:12शुभ
चर20:12 – 21:36सामान्य
रोग21:36 – 23:01टालें
काल23:01 – 00:26टालें
लाभ00:26 – 01:50शुभ
उद्वेग01:50 – 03:15टालें
शुभ03:15 – 04:40शुभ
अमृत04:40 – 06:04शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0407:08दिन
मंगल07:0808:11दिन
सूर्य08:1109:15दिन
शुक्र09:1510:18दिन
बुध10:1811:22दिन
चंद्र11:2212:26दिन
शनि12:2613:29दिन
गुरु13:2914:33दिन
मंगल14:3315:36दिन
सूर्य15:3616:40दिन
शुक्र16:4017:44दिन
बुध17:4418:47दिन
चंद्र18:4719:44रात
शनि19:4420:40रात
गुरु20:4021:36रात
मंगल21:3622:33रात
सूर्य22:3323:29रात
शुक्र23:2900:26रात
बुध00:2601:22रात
चंद्र01:2202:19रात
शनि02:1903:15रात
गुरु03:1504:11रात
मंगल04:1105:08रात
सूर्य05:0806:04रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 जुल॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 अग॰ 2027श्रावण अमावस्याअमावस्या
5 अग॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 अग॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 अग॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 अग॰ 2027श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
17 अग॰ 2027सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
21 अग॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
25 अग॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां बेंगलुरु में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2422° (लाहिड़ी)। समय बेंगलुरु (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।