2 मई 2028 को बेंगलुरु का पंचांग

मंगलवार, 2 मई 2028, बेंगलुरु, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 2 मई 2028 को बेंगलुरु में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (18:55 तक), नक्षत्र आश्लेषा (04:24, 3 मई तक) और योग गंड है। सूर्योदय 05:58 पर और सूर्यास्त 18:34 पर है। राहुकाल 15:25 से 17:00 तक है।

दिन और रात
दिन 05:58 – 18:34
रात 05:58 तक
तिथि
अष्टमी, 18:55 तक
नवमी
नक्षत्र
आश्लेषा, 04:24 तक
मघा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 मई 2028 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 18:55 तक
शुक्ल नवमी 16:41, 3 मई तक
नक्षत्र
आश्लेषा 04:24, 3 मई तक
मघा 02:49, 4 मई तक
योग
गंडअशुभ 19:44 तक
वृद्धि 16:50, 3 मई तक
करण
विष्टि (भद्रा) 07:55 तक
बव 18:55 तक
बालव 05:50, 3 मई तक
कौलव 16:41, 3 मई तक
चंद्र राशि
कर्क 04:24, 3 मई तक
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:58
सूर्यास्त
18:34
चंद्रोदय
12:30
चंद्रास्त
00:34
दिनमान
12h 36m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:27 – 05:12
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:41

अशुभ समय

राहुकाल
15:25 – 17:00
यमगंड
09:07 – 10:42
गुलिक काल
12:16 – 13:51

2 मई 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:58 – 07:32टालें
उद्वेग07:32 – 09:07टालें
चर09:07 – 10:42सामान्य
लाभ10:42 – 12:16शुभ
अमृत12:16 – 13:51शुभ
काल13:51 – 15:25टालें
शुभ15:25 – 17:00शुभ
रोग17:00 – 18:34टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:34 – 20:00टालें
लाभ20:00 – 21:25शुभ
उद्वेग21:25 – 22:51टालें
शुभ22:51 – 00:16शुभ
अमृत00:16 – 01:41शुभ
चर01:41 – 03:07सामान्य
रोग03:07 – 04:32टालें
काल04:32 – 05:58टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:5807:01दिन
सूर्य07:0108:04दिन
शुक्र08:0409:07दिन
बुध09:0710:10दिन
चंद्र10:1011:13दिन
शनि11:1312:16दिन
गुरु12:1613:19दिन
मंगल13:1914:22दिन
सूर्य14:2215:25दिन
शुक्र15:2516:28दिन
बुध16:2817:31दिन
चंद्र17:3118:34दिन
शनि18:3419:31रात
गुरु19:3120:28रात
मंगल20:2821:25रात
सूर्य21:2522:22रात
शुक्र22:2223:19रात
बुध23:1900:16रात
चंद्र00:1601:13रात
शनि01:1302:10रात
गुरु02:1003:07रात
मंगल03:0704:04रात
सूर्य04:0405:01रात
शुक्र05:0105:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 मई 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 मई 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
8 मई 2028वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
12 मई 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मई 2028वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 मई 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 मई 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 मई 2028ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
28 मई 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां बेंगलुरु में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2529° (लाहिड़ी)। समय बेंगलुरु (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।