22 जून 2029 को बेंगलुरु का पंचांग

शुक्रवार, 22 जून 2029, बेंगलुरु, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 22 जून 2029 को बेंगलुरु में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (18:34 तक), नक्षत्र स्वाति (20:01 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 05:54 पर और सूर्यास्त 18:48 पर है। राहुकाल 10:44 से 12:21 तक है।

दिन और रात
दिन 05:54 – 18:48
रात 05:55 तक
तिथि
एकादशी, 18:34 तक
द्वादशी
नक्षत्र
स्वाति, 20:01 तक
विशाखा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 जून 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 18:34 तक
शुक्ल द्वादशी 15:53, 23 जून तक
नक्षत्र
स्वाति 20:01 तक
विशाखा 18:08, 23 जून तक
योग
शिव 19:12 तक
सिद्ध 15:57, 23 जून तक
करण
वणिज 07:55 तक
विष्टि (भद्रा) 18:34 तक
बव 05:13, 23 जून तक
बालव 15:53, 23 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:54
सूर्यास्त
18:48
चंद्रोदय
15:05
चंद्रास्त
01:59
दिनमान
12h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:26 – 05:10
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
10:44 – 12:21
यमगंड
15:35 – 17:11
गुलिक काल
07:31 – 09:08

22 जून 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:54 – 07:31सामान्य
लाभ07:31 – 09:08शुभ
अमृत09:08 – 10:44शुभ
काल10:44 – 12:21टालें
शुभ12:21 – 13:58शुभ
रोग13:58 – 15:35टालें
उद्वेग15:35 – 17:11टालें
चर17:11 – 18:48सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:48 – 20:11टालें
काल20:11 – 21:35टालें
लाभ21:35 – 22:58शुभ
उद्वेग22:58 – 00:21टालें
शुभ00:21 – 01:45शुभ
अमृत01:45 – 03:08शुभ
चर03:08 – 04:31सामान्य
रोग04:31 – 05:55टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5406:59दिन
बुध06:5908:03दिन
चंद्र08:0309:08दिन
शनि09:0810:12दिन
गुरु10:1211:17दिन
मंगल11:1712:21दिन
सूर्य12:2113:26दिन
शुक्र13:2614:30दिन
बुध14:3015:35दिन
चंद्र15:3516:39दिन
शनि16:3917:43दिन
गुरु17:4318:48दिन
मंगल18:4819:43रात
सूर्य19:4320:39रात
शुक्र20:3921:35रात
बुध21:3522:30रात
चंद्र22:3023:26रात
शनि23:2600:21रात
गुरु00:2101:17रात
मंगल01:1702:12रात
सूर्य02:1203:08रात
शुक्र03:0804:04रात
बुध04:0404:59रात
चंद्र04:5905:55रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जून 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 जून 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 जून 2029ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
29 जून 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 जुल॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 जुल॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 जुल॰ 2029आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
15 जुल॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 जुल॰ 2029कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुल॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां बेंगलुरु में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2688° (लाहिड़ी)। समय बेंगलुरु (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।