2 दिसंबर 2029 को बेंगलुरु का पंचांग

रविवार, 2 दिसंबर 2029, बेंगलुरु, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 2 दिसंबर 2029 को बेंगलुरु में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (09:52 तक), नक्षत्र चित्रा (23:55 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:26 पर और सूर्यास्त 17:51 पर है। राहुकाल 16:25 से 17:51 तक है।

दिन और रात
दिन 06:26 – 17:51
रात 06:27 तक
तिथि
एकादशी, 09:52 तक
द्वादशी
नक्षत्र
चित्रा, 23:55 तक
स्वाति
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 दिसंबर 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 09:52 तक
कृष्ण द्वादशी 06:41, 3 दिस॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 23:55 तक
स्वाति 21:18, 3 दिस॰ तक
योग
सौभाग्य 00:03, 3 दिस॰ तक
शोभन 20:05, 3 दिस॰ तक
करण
बालव 09:52 तक
कौलव 20:19 तक
तैतिल 06:41, 3 दिस॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 13:08 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:26
सूर्यास्त
17:51
चंद्रोदय
02:45
चंद्रास्त
14:46
दिनमान
11h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:45 – 05:36
अभिजीत मुहूर्त
11:46 – 12:31

अशुभ समय

राहुकाल
16:25 – 17:51
यमगंड
12:08 – 13:34
गुलिक काल
15:00 – 16:25

2 दिसंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:26 – 07:52टालें
चर07:52 – 09:17सामान्य
लाभ09:17 – 10:43शुभ
अमृत10:43 – 12:08शुभ
काल12:08 – 13:34टालें
शुभ13:34 – 15:00शुभ
रोग15:00 – 16:25टालें
उद्वेग16:25 – 17:51टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:51 – 19:25शुभ
अमृत19:25 – 21:00शुभ
चर21:00 – 22:34सामान्य
रोग22:34 – 00:09टालें
काल00:09 – 01:43टालें
लाभ01:43 – 03:18शुभ
उद्वेग03:18 – 04:52टालें
शुभ04:52 – 06:27शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:2607:23दिन
शुक्र07:2308:20दिन
बुध08:2009:17दिन
चंद्र09:1710:14दिन
शनि10:1411:11दिन
गुरु11:1112:08दिन
मंगल12:0813:06दिन
सूर्य13:0614:03दिन
शुक्र14:0315:00दिन
बुध15:0015:57दिन
चंद्र15:5716:54दिन
शनि16:5417:51दिन
गुरु17:5118:54रात
मंगल18:5419:57रात
सूर्य19:5721:00रात
शुक्र21:0022:03रात
बुध22:0323:06रात
चंद्र23:0600:09रात
शनि00:0901:12रात
गुरु01:1202:15रात
मंगल02:1503:18रात
सूर्य03:1804:21रात
शुक्र04:2105:24रात
बुध05:2406:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
5 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
9 दिस॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 दिस॰ 2029धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
25 दिस॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 दिस॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
31 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां बेंगलुरु में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2750° (लाहिड़ी)। समय बेंगलुरु (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।