9 मार्च 2026 को भावनगर का पंचांग

सोमवार, 9 मार्च 2026, भावनगर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 9 मार्च 2026 को भावनगर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (23:27 तक), नक्षत्र विशाखा (16:11 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:55 पर और सूर्यास्त 18:48 पर है। राहुकाल 08:24 से 09:53 तक है।

दिन और रात
दिन 06:55 – 18:48
रात 06:54 तक
तिथि
षष्ठी, 23:27 तक
सप्तमी
नक्षत्र
विशाखा, 16:11 तक
अनुराधा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 मार्च 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 23:27 तक
कृष्ण सप्तमी 01:54, 11 मार्च तक
नक्षत्र
विशाखा 16:11 तक
अनुराधा 19:05, 10 मार्च तक
योग
व्याघातअशुभ 07:35 तक
हर्षण 08:21, 10 मार्च तक
करण
गर 10:17 तक
वणिज 23:27 तक
विष्टि (भद्रा) 12:40, 10 मार्च तक
चंद्र राशि
तुला 09:29 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:55
सूर्यास्त
18:48
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
10:16
दिनमान
11h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:18 – 06:07
अभिजीत मुहूर्त
12:28 – 13:15

अशुभ समय

राहुकाल
08:24 – 09:53
यमगंड
11:22 – 12:52
गुलिक काल
14:21 – 15:50

9 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:55 – 08:24शुभ
काल08:24 – 09:53टालें
शुभ09:53 – 11:22शुभ
रोग11:22 – 12:52टालें
उद्वेग12:52 – 14:21टालें
चर14:21 – 15:50सामान्य
लाभ15:50 – 17:19शुभ
अमृत17:19 – 18:48शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:48 – 20:19सामान्य
रोग20:19 – 21:50टालें
काल21:50 – 23:20टालें
लाभ23:20 – 00:51शुभ
उद्वेग00:51 – 02:22टालें
शुभ02:22 – 03:53शुभ
अमृत03:53 – 05:24शुभ
चर05:24 – 06:54सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:5507:55दिन
शनि07:5508:54दिन
गुरु08:5409:53दिन
मंगल09:5310:53दिन
सूर्य10:5311:52दिन
शुक्र11:5212:52दिन
बुध12:5213:51दिन
चंद्र13:5114:50दिन
शनि14:5015:50दिन
गुरु15:5016:49दिन
मंगल16:4917:49दिन
सूर्य17:4918:48दिन
शुक्र18:4819:48रात
बुध19:4820:49रात
चंद्र20:4921:50रात
शनि21:5022:50रात
गुरु22:5023:51रात
मंगल23:5100:51रात
सूर्य00:5101:52रात
शुक्र01:5202:52रात
बुध02:5203:53रात
चंद्र03:5304:53रात
शनि04:5305:54रात
गुरु05:5406:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 मार्च 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 मार्च 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 मार्च 2026मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
17 मार्च 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 मार्च 2026चैत्र अमावस्याअमावस्या
22 मार्च 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 मार्च 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 अप्रैल 2026चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
6 अप्रैल 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां भावनगर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2228° (लाहिड़ी)। समय भावनगर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।