22 फ़रवरी 2029 को बिलासपुर का पंचांग

गुरुवार, 22 फ़रवरी 2029, बिलासपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 22 फ़रवरी 2029 को बिलासपुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (09:19 तक), नक्षत्र रोहिणी (00:13, 23 फ़र॰ तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:27 पर और सूर्यास्त 18:02 पर है। राहुकाल 13:41 से 15:08 तक है।

दिन और रात
दिन 06:27 – 18:02
रात 06:27 तक
तिथि
नवमी
नक्षत्र
रोहिणी, 00:13 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 फ़रवरी 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 09:19 तक
शुक्ल नवमी 10:06, 23 फ़र॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 00:13, 23 फ़र॰ तक
मृगशिरा 01:06, 24 फ़र॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 18:04 तक
विष्कंभअशुभ 17:19, 23 फ़र॰ तक
करण
बव 09:19 तक
बालव 21:49 तक
कौलव 10:06, 23 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:27
सूर्यास्त
18:02
चंद्रोदय
11:45
चंद्रास्त
00:46
दिनमान
11h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:48 – 05:38
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:38

अशुभ समय

राहुकाल
13:41 – 15:08
यमगंड
06:27 – 07:54
गुलिक काल
09:21 – 10:48

22 फ़रवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:27 – 07:54शुभ
रोग07:54 – 09:21टालें
उद्वेग09:21 – 10:48टालें
चर10:48 – 12:14सामान्य
लाभ12:14 – 13:41शुभ
अमृत13:41 – 15:08शुभ
काल15:08 – 16:35टालें
शुभ16:35 – 18:02शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:02 – 19:35शुभ
चर19:35 – 21:08सामान्य
रोग21:08 – 22:41टालें
काल22:41 – 00:14टालें
लाभ00:14 – 01:47शुभ
उद्वेग01:47 – 03:20टालें
शुभ03:20 – 04:53शुभ
अमृत04:53 – 06:27शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:2707:25दिन
मंगल07:2508:23दिन
सूर्य08:2309:21दिन
शुक्र09:2110:19दिन
बुध10:1911:17दिन
चंद्र11:1712:14दिन
शनि12:1413:12दिन
गुरु13:1214:10दिन
मंगल14:1015:08दिन
सूर्य15:0816:06दिन
शुक्र16:0617:04दिन
बुध17:0418:02दिन
चंद्र18:0219:04रात
शनि19:0420:06रात
गुरु20:0621:08रात
मंगल21:0822:10रात
सूर्य22:1023:12रात
शुक्र23:1200:14रात
बुध00:1401:16रात
चंद्र01:1602:18रात
शनि02:1803:20रात
गुरु03:2004:22रात
मंगल04:2205:25रात
सूर्य05:2506:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 फ़र॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2029फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
4 मार्च 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 मार्च 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 मार्च 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 मार्च 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 मार्च 2029मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
15 मार्च 2029चैत्र अमावस्याअमावस्या
19 मार्च 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां बिलासपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2642° (लाहिड़ी)। समय बिलासपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।