20 जनवरी 2011 को चेन्नई का पंचांग

गुरुवार, 20 जनवरी 2011, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 20 जनवरी 2011 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (00:01, 21 जन॰ तक), नक्षत्र पुष्य (21:18 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 18:03 पर है। राहुकाल 13:45 से 15:11 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 18:03
रात 06:35 तक
तिथि
प्रतिपदा, 00:01 तक
द्वितीया
नक्षत्र
पुष्य, 21:18 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 जनवरी 2011 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 00:01, 21 जन॰ तक
कृष्ण द्वितीया 20:57, 21 जन॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 21:18 तक
आश्लेषा 18:58, 21 जन॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 06:39 तक
प्रीति 03:04, 21 जन॰ तक
आयुष्मान 23:19, 21 जन॰ तक
करण
बालव 13:28 तक
कौलव 00:01, 21 जन॰ तक
तैतिल 10:30, 21 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
18:03
चंद्रोदय
18:39
चंद्रास्त
06:42
दिनमान
11h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2067
शक संवत
1932, विकृति संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:55 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:42

अशुभ समय

राहुकाल
13:45 – 15:11
यमगंड
06:35 – 08:01
गुलिक काल
09:27 – 10:53

20 जनवरी 2011 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:35 – 08:01शुभ
रोग08:01 – 09:27टालें
उद्वेग09:27 – 10:53टालें
चर10:53 – 12:19सामान्य
लाभ12:19 – 13:45शुभ
अमृत13:45 – 15:11शुभ
काल15:11 – 16:37टालें
शुभ16:37 – 18:03शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:03 – 19:37शुभ
चर19:37 – 21:11सामान्य
रोग21:11 – 22:45टालें
काल22:45 – 00:19टालें
लाभ00:19 – 01:53शुभ
उद्वेग01:53 – 03:27टालें
शुभ03:27 – 05:01शुभ
अमृत05:01 – 06:35शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:3507:33दिन
मंगल07:3308:30दिन
सूर्य08:3009:27दिन
शुक्र09:2710:25दिन
बुध10:2511:22दिन
चंद्र11:2212:19दिन
शनि12:1913:17दिन
गुरु13:1714:14दिन
मंगल14:1415:11दिन
सूर्य15:1116:09दिन
शुक्र16:0917:06दिन
बुध17:0618:03दिन
चंद्र18:0319:06रात
शनि19:0620:09रात
गुरु20:0921:11रात
मंगल21:1122:14रात
सूर्य22:1423:17रात
शुक्र23:1700:19रात
बुध00:1901:22रात
चंद्र01:2202:25रात
शनि02:2503:27रात
गुरु03:2704:30रात
मंगल04:3005:33रात
सूर्य05:3306:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 जन॰ 2011संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
26 जन॰ 2011कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जन॰ 2011कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जन॰ 2011प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 फ़र॰ 2011माघ अमावस्याअमावस्या
7 फ़र॰ 2011विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2011कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2011शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 फ़र॰ 2011प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
18 फ़र॰ 2011माघ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0114° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।