21 जनवरी 2011 को चेन्नई का पंचांग

शुक्रवार, 21 जनवरी 2011, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 21 जनवरी 2011 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (20:57 तक), नक्षत्र आश्लेषा (18:58 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 18:04 पर है। राहुकाल 10:54 से 12:20 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 18:04
रात 06:35 तक
तिथि
द्वितीया, 20:57 तक
तृतीया
नक्षत्र
आश्लेषा, 18:58 तक
मघा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 जनवरी 2011 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 20:57 तक
कृष्ण तृतीया 17:48, 22 जन॰ तक
नक्षत्र
मघा 16:34, 22 जन॰ तक
योग
आयुष्मान 23:19 तक
सौभाग्य 19:31, 22 जन॰ तक
करण
तैतिल 10:30 तक
गर 20:57 तक
वणिज 07:23, 22 जन॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 18:58 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
18:04
चंद्रोदय
19:39
चंद्रास्त
07:32
दिनमान
11h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2067
शक संवत
1932, विकृति संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:55 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:43

अशुभ समय

राहुकाल
10:54 – 12:20
यमगंड
15:12 – 16:38
गुलिक काल
08:01 – 09:27

21 जनवरी 2011 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:35 – 08:01सामान्य
लाभ08:01 – 09:27शुभ
अमृत09:27 – 10:54शुभ
काल10:54 – 12:20टालें
शुभ12:20 – 13:46शुभ
रोग13:46 – 15:12टालें
उद्वेग15:12 – 16:38टालें
चर16:38 – 18:04सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:04 – 19:38टालें
काल19:38 – 21:12टालें
लाभ21:12 – 22:46शुभ
उद्वेग22:46 – 00:20टालें
शुभ00:20 – 01:54शुभ
अमृत01:54 – 03:27शुभ
चर03:27 – 05:01सामान्य
रोग05:01 – 06:35टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:3507:33दिन
बुध07:3308:30दिन
चंद्र08:3009:27दिन
शनि09:2710:25दिन
गुरु10:2511:22दिन
मंगल11:2212:20दिन
सूर्य12:2013:17दिन
शुक्र13:1714:14दिन
बुध14:1415:12दिन
चंद्र15:1216:09दिन
शनि16:0917:07दिन
गुरु17:0718:04दिन
मंगल18:0419:07रात
सूर्य19:0720:09रात
शुक्र20:0921:12रात
बुध21:1222:14रात
चंद्र22:1423:17रात
शनि23:1700:20रात
गुरु00:2001:22रात
मंगल01:2202:25रात
सूर्य02:2503:27रात
शुक्र03:2704:30रात
बुध04:3005:33रात
चंद्र05:3306:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 जन॰ 2011संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
26 जन॰ 2011कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जन॰ 2011कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जन॰ 2011प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 फ़र॰ 2011माघ अमावस्याअमावस्या
7 फ़र॰ 2011विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2011कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2011शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 फ़र॰ 2011प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
18 फ़र॰ 2011माघ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0115° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।