2 अक्टूबर 2026 को डैलस का पंचांग

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026, डैलस, संयुक्त राज्य। समय America/Chicago में है।

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को डैलस में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (21:30 तक), नक्षत्र मृगशिरा (16:25 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 07:22 पर और सूर्यास्त 19:10 पर है। राहुकाल 11:47 से 13:16 तक है।

दिन और रात
दिन 07:22 – 19:10
रात 07:22 तक
तिथि
सप्तमी, 21:30 तक
अष्टमी
नक्षत्र
मृगशिरा, 16:25 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 21:30 तक
कृष्ण अष्टमी 19:22, 3 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 14:59, 3 अक्टू॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 07:47 तक
वरीयान 04:51, 3 अक्टू॰ तक
परिघअशुभ 02:02, 4 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 10:37 तक
बव 21:30 तक
बालव 08:25, 3 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:22
सूर्यास्त
19:10
चंद्रोदय
23:45
चंद्रास्त
13:57
दिनमान
11h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:44 – 06:33
अभिजीत मुहूर्त
12:52 – 13:39

अशुभ समय

राहुकाल
11:47 – 13:16
यमगंड
16:13 – 17:41
गुलिक काल
08:50 – 10:19

2 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:22 – 08:50सामान्य
लाभ08:50 – 10:19शुभ
अमृत10:19 – 11:47शुभ
काल11:47 – 13:16टालें
शुभ13:16 – 14:44शुभ
रोग14:44 – 16:13टालें
उद्वेग16:13 – 17:41टालें
चर17:41 – 19:10सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:10 – 20:41टालें
काल20:41 – 22:13टालें
लाभ22:13 – 23:45शुभ
उद्वेग23:45 – 01:16टालें
शुभ01:16 – 02:48शुभ
अमृत02:48 – 04:19शुभ
चर04:19 – 05:51सामान्य
रोग05:51 – 07:22टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:2208:21दिन
बुध08:2109:20दिन
चंद्र09:2010:19दिन
शनि10:1911:18दिन
गुरु11:1812:17दिन
मंगल12:1713:16दिन
सूर्य13:1614:15दिन
शुक्र14:1515:14दिन
बुध15:1416:13दिन
चंद्र16:1317:12दिन
शनि17:1218:11दिन
गुरु18:1119:10दिन
मंगल19:1020:11रात
सूर्य20:1121:12रात
शुक्र21:1222:13रात
बुध22:1323:14रात
चंद्र23:1400:15रात
शनि00:1501:16रात
गुरु01:1602:17रात
मंगल02:1703:18रात
सूर्य03:1804:19रात
शुक्र04:1905:20रात
बुध05:2006:21रात
चंद्र06:2107:22रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
21 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां डैलस में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2308° (लाहिड़ी)। समय डैलस (America/Chicago) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।