9 अप्रैल 2028 को देवघर का पंचांग

रविवार, 9 अप्रैल 2028, देवघर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 9 अप्रैल 2028 को देवघर में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (15:56 तक), नक्षत्र हस्त (11:52 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:26 पर और सूर्यास्त 18:02 पर है। राहुकाल 16:28 से 18:02 तक है।

दिन और रात
दिन 05:26 – 18:02
रात 05:26 तक
तिथि
पूर्णिमा, 15:56 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
हस्त, 11:52 तक
चित्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 अप्रैल 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
पूर्णिमा 15:56 तक
कृष्ण प्रतिपदा 12:58, 10 अप्रैल तक
नक्षत्र
हस्त 11:52 तक
चित्रा 09:37, 10 अप्रैल तक
योग
व्याघातअशुभ 18:27 तक
हर्षण 14:56, 10 अप्रैल तक
करण
विष्टि (भद्रा) 05:32 तक
बव 15:56 तक
बालव 02:24, 10 अप्रैल तक
कौलव 12:58, 10 अप्रैल तक
चंद्र राशि
कन्या 22:42 तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:26
सूर्यास्त
18:02
चंद्रोदय
18:06
चंद्रास्त
04:54
दिनमान
12h 36m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:55 – 04:41
अभिजीत मुहूर्त
11:19 – 12:10

अशुभ समय

राहुकाल
16:28 – 18:02
यमगंड
11:44 – 13:19
गुलिक काल
14:53 – 16:28

9 अप्रैल 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:26 – 07:01टालें
चर07:01 – 08:35सामान्य
लाभ08:35 – 10:10शुभ
अमृत10:10 – 11:44शुभ
काल11:44 – 13:19टालें
शुभ13:19 – 14:53शुभ
रोग14:53 – 16:28टालें
उद्वेग16:28 – 18:02टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:02 – 19:28शुभ
अमृत19:28 – 20:53शुभ
चर20:53 – 22:18सामान्य
रोग22:18 – 23:44टालें
काल23:44 – 01:09टालें
लाभ01:09 – 02:35शुभ
उद्वेग02:35 – 04:00टालें
शुभ04:00 – 05:26शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:2606:29दिन
शुक्र06:2907:32दिन
बुध07:3208:35दिन
चंद्र08:3509:38दिन
शनि09:3810:41दिन
गुरु10:4111:44दिन
मंगल11:4412:47दिन
सूर्य12:4713:50दिन
शुक्र13:5014:53दिन
बुध14:5315:56दिन
चंद्र15:5616:59दिन
शनि16:5918:02दिन
गुरु18:0218:59रात
मंगल18:5919:56रात
सूर्य19:5620:53रात
शुक्र20:5321:50रात
बुध21:5022:47रात
चंद्र22:4723:44रात
शनि23:4400:41रात
गुरु00:4101:38रात
मंगल01:3802:35रात
सूर्य02:3503:32रात
शुक्र03:3204:29रात
बुध04:2905:26रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 अप्रैल 2028चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
13 अप्रैल 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 अप्रैल 2028मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 अप्रैल 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 अप्रैल 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 अप्रैल 2028वैशाख अमावस्याअमावस्या
28 अप्रैल 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 मई 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 मई 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
8 मई 2028वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां देवघर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2520° (लाहिड़ी)। समय देवघर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।