29 अक्टूबर 2027 को धनबाद का पंचांग

शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027, धनबाद, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027 को धनबाद में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (19:06 तक), नक्षत्र चित्रा (10:27 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:48 पर और सूर्यास्त 17:07 पर है। राहुकाल 10:02 से 11:27 तक है।

दिन और रात
दिन 05:48 – 17:07
रात 05:48 तक
तिथि
अमावस्या, 19:06 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
चित्रा, 10:27 तक
स्वाति
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
अमावस्या 19:06 तक
शुक्ल प्रतिपदा 17:52, 30 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 10:27 तक
स्वाति 09:43, 30 अक्टू॰ तक
योग
प्रीति 00:34, 30 अक्टू॰ तक
आयुष्मान 22:30, 30 अक्टू॰ तक
करण
चतुष्पद 07:54 तक
नाग 19:06 तक
किंस्तुघ्न 06:25, 30 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:48
सूर्यास्त
17:07
चंद्रोदय
05:20
चंद्रास्त
16:42
दिनमान
11h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:06 – 04:57
अभिजीत मुहूर्त
11:05 – 11:50

अशुभ समय

राहुकाल
10:02 – 11:27
यमगंड
14:17 – 15:42
गुलिक काल
07:13 – 08:38

29 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:48 – 07:13सामान्य
लाभ07:13 – 08:38शुभ
अमृत08:38 – 10:02शुभ
काल10:02 – 11:27टालें
शुभ11:27 – 12:52शुभ
रोग12:52 – 14:17टालें
उद्वेग14:17 – 15:42टालें
चर15:42 – 17:07सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:07 – 18:42टालें
काल18:42 – 20:17टालें
लाभ20:17 – 21:52शुभ
उद्वेग21:52 – 23:28टालें
शुभ23:28 – 01:03शुभ
अमृत01:03 – 02:38शुभ
चर02:38 – 04:13सामान्य
रोग04:13 – 05:48टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:4806:44दिन
बुध06:4407:41दिन
चंद्र07:4108:38दिन
शनि08:3809:34दिन
गुरु09:3410:31दिन
मंगल10:3111:27दिन
सूर्य11:2712:24दिन
शुक्र12:2413:21दिन
बुध13:2114:17दिन
चंद्र14:1715:14दिन
शनि15:1416:10दिन
गुरु16:1017:07दिन
मंगल17:0718:10रात
सूर्य18:1019:14रात
शुक्र19:1420:17रात
बुध20:1721:21रात
चंद्र21:2122:24रात
शनि22:2423:28रात
गुरु23:2800:31रात
मंगल00:3101:35रात
सूर्य01:3502:38रात
शुक्र02:3803:41रात
बुध03:4104:45रात
चंद्र04:4505:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां धनबाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2457° (लाहिड़ी)। समय धनबाद (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।