22 अगस्त 2025 को दोहा का पंचांग

शुक्रवार, 22 अगस्त 2025, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

शुक्रवार, 22 अगस्त 2025 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (09:26 तक), नक्षत्र आश्लेषा (21:46 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:10 पर और सूर्यास्त 18:02 पर है। राहुकाल 10:00 से 11:36 तक है।

दिन और रात
दिन 05:10 – 18:02
रात 05:10 तक
तिथि
चतुर्दशी, 09:26 तक
अमावस्या
नक्षत्र
आश्लेषा, 21:46 तक
मघा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 अगस्त 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 09:26 तक
अमावस्या 09:06, 23 अग॰ तक
नक्षत्र
मघा 22:25, 23 अग॰ तक
योग
वरीयान 12:05 तक
परिघअशुभ 10:49, 23 अग॰ तक
करण
शकुनि 09:26 तक
चतुष्पद 21:12 तक
नाग 09:06, 23 अग॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 21:46 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:10
सूर्यास्त
18:02
चंद्रोदय
04:05
चंद्रास्त
17:41
दिनमान
12h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:41 – 04:26
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 12:02

अशुभ समय

राहुकाल
10:00 – 11:36
यमगंड
14:49 – 16:26
गुलिक काल
06:47 – 08:23

22 अगस्त 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:10 – 06:47सामान्य
लाभ06:47 – 08:23शुभ
अमृत08:23 – 10:00शुभ
काल10:00 – 11:36टालें
शुभ11:36 – 13:13शुभ
रोग13:13 – 14:49टालें
उद्वेग14:49 – 16:26टालें
चर16:26 – 18:02सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:02 – 19:26टालें
काल19:26 – 20:49टालें
लाभ20:49 – 22:13शुभ
उद्वेग22:13 – 23:36टालें
शुभ23:36 – 01:00शुभ
अमृत01:00 – 02:23शुभ
चर02:23 – 03:47सामान्य
रोग03:47 – 05:10टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:1006:14दिन
बुध06:1407:19दिन
चंद्र07:1908:23दिन
शनि08:2309:27दिन
गुरु09:2710:32दिन
मंगल10:3211:36दिन
सूर्य11:3612:40दिन
शुक्र12:4013:45दिन
बुध13:4514:49दिन
चंद्र14:4915:53दिन
शनि15:5316:58दिन
गुरु16:5818:02दिन
मंगल18:0218:58रात
सूर्य18:5819:53रात
शुक्र19:5320:49रात
बुध20:4921:45रात
चंद्र21:4522:41रात
शनि22:4123:36रात
गुरु23:3600:32रात
मंगल00:3201:28रात
सूर्य01:2802:23रात
शुक्र02:2303:19रात
बुध03:1904:15रात
चंद्र04:1505:10रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 अग॰ 2025भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
27 अग॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 सित॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 सित॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 सित॰ 2025भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
11 सित॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 सित॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 सित॰ 2025कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सित॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2152° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।