20 अक्टूबर 2025 को दोहा का पंचांग

सोमवार, 20 अक्टूबर 2025, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

सोमवार, 20 अक्टूबर 2025 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (13:15 तक), नक्षत्र हस्त (17:46 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:34 पर और सूर्यास्त 17:02 पर है। राहुकाल 07:00 से 08:26 तक है।

दिन और रात
दिन 05:34 – 17:02
रात 05:35 तक
तिथि
चतुर्दशी, 13:15 तक
अमावस्या
नक्षत्र
हस्त, 17:46 तक
चित्रा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 13:15 तक
अमावस्या 15:25, 21 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
हस्त 17:46 तक
चित्रा 20:28, 21 अक्टू॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 00:04, 21 अक्टू॰ तक
विष्कंभअशुभ 00:46, 22 अक्टू॰ तक
करण
शकुनि 13:15 तक
चतुष्पद 02:18, 21 अक्टू॰ तक
नाग 15:25, 21 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:34
सूर्यास्त
17:02
चंद्रोदय
04:27
चंद्रास्त
16:17
दिनमान
11h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:54 – 04:44
अभिजीत मुहूर्त
10:55 – 11:41

अशुभ समय

राहुकाल
07:00 – 08:26
यमगंड
09:52 – 11:18
गुलिक काल
12:44 – 14:10

20 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:34 – 07:00शुभ
काल07:00 – 08:26टालें
शुभ08:26 – 09:52शुभ
रोग09:52 – 11:18टालें
उद्वेग11:18 – 12:44टालें
चर12:44 – 14:10सामान्य
लाभ14:10 – 15:36शुभ
अमृत15:36 – 17:02शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:02 – 18:36सामान्य
रोग18:36 – 20:10टालें
काल20:10 – 21:44टालें
लाभ21:44 – 23:18शुभ
उद्वेग23:18 – 00:52टालें
शुभ00:52 – 02:27शुभ
अमृत02:27 – 04:01शुभ
चर04:01 – 05:35सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:3406:32दिन
शनि06:3207:29दिन
गुरु07:2908:26दिन
मंगल08:2609:23दिन
सूर्य09:2310:21दिन
शुक्र10:2111:18दिन
बुध11:1812:15दिन
चंद्र12:1513:13दिन
शनि13:1314:10दिन
गुरु14:1015:07दिन
मंगल15:0716:04दिन
सूर्य16:0417:02दिन
शुक्र17:0218:04रात
बुध18:0419:07रात
चंद्र19:0720:10रात
शनि20:1021:13रात
गुरु21:1322:15रात
मंगल22:1523:18रात
सूर्य23:1800:21रात
शुक्र00:2101:24रात
बुध01:2402:27रात
चंद्र02:2703:29रात
शनि03:2904:32रात
गुरु04:3205:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
25 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
8 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2175° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।