12 नवंबर 2025 को दोहा का पंचांग

बुधवार, 12 नवंबर 2025, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

बुधवार, 12 नवंबर 2025 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (20:28 तक), नक्षत्र आश्लेषा (16:05 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:48 पर और सूर्यास्त 16:46 पर है। राहुकाल 11:17 से 12:40 तक है।

दिन और रात
दिन 05:48 – 16:46
रात 05:49 तक
तिथि
अष्टमी, 20:28 तक
नवमी
नक्षत्र
आश्लेषा, 16:05 तक
मघा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 नवंबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 20:28 तक
कृष्ण नवमी 21:04, 13 नव॰ तक
नक्षत्र
मघा 17:08, 13 नव॰ तक
योग
ब्रह्म 04:27, 13 नव॰ तक
इंद्र 03:57, 14 नव॰ तक
करण
बालव 08:28 तक
कौलव 20:28 तक
तैतिल 08:41, 13 नव॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 16:05 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:48
सूर्यास्त
16:46
चंद्रोदय
23:43
चंद्रास्त
12:18
दिनमान
10h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:04 – 04:56
अभिजीत मुहूर्त
10:55 – 11:39 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:17 – 12:40
यमगंड
07:11 – 08:33
गुलिक काल
09:55 – 11:17

12 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:48 – 07:11शुभ
अमृत07:11 – 08:33शुभ
काल08:33 – 09:55टालें
शुभ09:55 – 11:17शुभ
रोग11:17 – 12:40टालें
उद्वेग12:40 – 14:02टालें
चर14:02 – 15:24सामान्य
लाभ15:24 – 16:46शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग16:46 – 18:24टालें
शुभ18:24 – 20:02शुभ
अमृत20:02 – 21:40शुभ
चर21:40 – 23:18सामान्य
रोग23:18 – 00:56टालें
काल00:56 – 02:33टालें
लाभ02:33 – 04:11शुभ
उद्वेग04:11 – 05:49टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4806:43दिन
चंद्र06:4307:38दिन
शनि07:3808:33दिन
गुरु08:3309:28दिन
मंगल09:2810:23दिन
सूर्य10:2311:17दिन
शुक्र11:1712:12दिन
बुध12:1213:07दिन
चंद्र13:0714:02दिन
शनि14:0214:57दिन
गुरु14:5715:52दिन
मंगल15:5216:46दिन
सूर्य16:4617:52रात
शुक्र17:5218:57रात
बुध18:5720:02रात
चंद्र20:0221:07रात
शनि21:0722:13रात
गुरु22:1323:18रात
मंगल23:1800:23रात
सूर्य00:2301:28रात
शुक्र01:2802:33रात
बुध02:3303:39रात
चंद्र03:3904:44रात
शनि04:4405:49रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 दिस॰ 2025मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
8 दिस॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2184° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।