14 सितंबर 2026 को दोहा का पंचांग

सोमवार, 14 सितंबर 2026, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

सोमवार, 14 सितंबर 2026 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (05:14, 15 सित॰ तक), नक्षत्र चित्रा (11:25 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:19 पर और सूर्यास्त 17:39 पर है। राहुकाल 06:51 से 08:24 तक है।

दिन और रात
दिन 05:19 – 17:39
रात 05:19 तक
तिथि
चतुर्थी, 05:14 तक
नक्षत्र
चित्रा, 11:25 तक
स्वाति
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 सितंबर 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 05:14, 15 सित॰ तक
शुक्ल पंचमी 06:29, 16 सित॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 11:25 तक
स्वाति 12:51, 15 सित॰ तक
योग
ब्रह्म 10:16 तक
इंद्र 09:50, 15 सित॰ तक
करण
वणिज 16:51 तक
विष्टि (भद्रा) 05:14, 15 सित॰ तक
बव 17:47, 15 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:19
सूर्यास्त
17:39
चंद्रोदय
08:13
चंद्रास्त
19:28
दिनमान
12h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:46 – 04:32
अभिजीत मुहूर्त
11:04 – 11:53

अशुभ समय

राहुकाल
06:51 – 08:24
यमगंड
09:56 – 11:29
गुलिक काल
13:01 – 14:34

14 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:19 – 06:51शुभ
काल06:51 – 08:24टालें
शुभ08:24 – 09:56शुभ
रोग09:56 – 11:29टालें
उद्वेग11:29 – 13:01टालें
चर13:01 – 14:34सामान्य
लाभ14:34 – 16:06शुभ
अमृत16:06 – 17:39शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:39 – 19:06सामान्य
रोग19:06 – 20:34टालें
काल20:34 – 22:01टालें
लाभ22:01 – 23:29शुभ
उद्वेग23:29 – 00:57टालें
शुभ00:57 – 02:24शुभ
अमृत02:24 – 03:52शुभ
चर03:52 – 05:19सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:1906:21दिन
शनि06:2107:22दिन
गुरु07:2208:24दिन
मंगल08:2409:26दिन
सूर्य09:2610:27दिन
शुक्र10:2711:29दिन
बुध11:2912:30दिन
चंद्र12:3013:32दिन
शनि13:3214:34दिन
गुरु14:3415:35दिन
मंगल15:3516:37दिन
सूर्य16:3717:39दिन
शुक्र17:3918:37रात
बुध18:3719:35रात
चंद्र19:3520:34रात
शनि20:3421:32रात
गुरु21:3222:31रात
मंगल22:3123:29रात
सूर्य23:2900:27रात
शुक्र00:2701:26रात
बुध01:2602:24रात
चंद्र02:2403:23रात
शनि03:2304:21रात
गुरु04:2105:19रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 सित॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2026कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
22 सित॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 सित॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 सित॰ 2026भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
30 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2301° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।