12 अक्टूबर 2026 को दोहा का पंचांग

सोमवार, 12 अक्टूबर 2026, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (19:43 तक), नक्षत्र स्वाति (21:22 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 05:30 पर और सूर्यास्त 17:09 पर है। राहुकाल 06:58 से 08:25 तक है।

दिन और रात
दिन 05:30 – 17:09
रात 05:31 तक
तिथि
द्वितीया, 19:43 तक
तृतीया
नक्षत्र
स्वाति, 21:22 तक
विशाखा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 19:43 तक
शुक्ल तृतीया 20:58, 13 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 21:22 तक
विशाखा 23:13, 13 अक्टू॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 18:02 तक
प्रीति 17:53, 13 अक्टू॰ तक
करण
बालव 07:18 तक
कौलव 19:43 तक
तैतिल 08:16, 13 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:30
सूर्यास्त
17:09
चंद्रोदय
06:58
चंद्रास्त
18:02
दिनमान
11h 39m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:52 – 04:41
अभिजीत मुहूर्त
10:56 – 11:43

अशुभ समय

राहुकाल
06:58 – 08:25
यमगंड
09:52 – 11:20
गुलिक काल
12:47 – 14:14

12 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:30 – 06:58शुभ
काल06:58 – 08:25टालें
शुभ08:25 – 09:52शुभ
रोग09:52 – 11:20टालें
उद्वेग11:20 – 12:47टालें
चर12:47 – 14:14सामान्य
लाभ14:14 – 15:42शुभ
अमृत15:42 – 17:09शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:09 – 18:42सामान्य
रोग18:42 – 20:15टालें
काल20:15 – 21:47टालें
लाभ21:47 – 23:20शुभ
उद्वेग23:20 – 00:53टालें
शुभ00:53 – 02:25शुभ
अमृत02:25 – 03:58शुभ
चर03:58 – 05:31सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:3006:28दिन
शनि06:2807:27दिन
गुरु07:2708:25दिन
मंगल08:2509:23दिन
सूर्य09:2310:21दिन
शुक्र10:2111:20दिन
बुध11:2012:18दिन
चंद्र12:1813:16दिन
शनि13:1614:14दिन
गुरु14:1415:13दिन
मंगल15:1316:11दिन
सूर्य16:1117:09दिन
शुक्र17:0918:11रात
बुध18:1119:13रात
चंद्र19:1320:15रात
शनि20:1521:16रात
गुरु21:1622:18रात
मंगल22:1823:20रात
सूर्य23:2000:22रात
शुक्र00:2201:24रात
बुध01:2402:25रात
चंद्र02:2503:27रात
शनि03:2704:29रात
गुरु04:2905:31रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2311° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।