7 दिसंबर 2026 को दोहा का पंचांग

सोमवार, 7 दिसंबर 2026, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

सोमवार, 7 दिसंबर 2026 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (01:43, 8 दिस॰ तक), नक्षत्र विशाखा (13:18 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 06:06 पर और सूर्यास्त 16:43 पर है। राहुकाल 07:26 से 08:45 तक है।

दिन और रात
दिन 06:06 – 16:43
रात 06:07 तक
तिथि
चतुर्दशी, 01:43 तक
अमावस्या
नक्षत्र
विशाखा, 13:18 तक
अनुराधा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 दिसंबर 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 01:43, 8 दिस॰ तक
अमावस्या 03:51, 9 दिस॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 13:18 तक
अनुराधा 15:46, 8 दिस॰ तक
योग
सुकर्मा 05:36, 8 दिस॰ तक
धृति 06:10, 9 दिस॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 12:45 तक
शकुनि 01:43, 8 दिस॰ तक
चतुष्पद 14:45, 8 दिस॰ तक
चंद्र राशि
तुला 06:44 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:06
सूर्यास्त
16:43
चंद्रोदय
04:35
चंद्रास्त
15:18
दिनमान
10h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:19 – 05:12
अभिजीत मुहूर्त
11:03 – 11:46

अशुभ समय

राहुकाल
07:26 – 08:45
यमगंड
10:05 – 11:25
गुलिक काल
12:44 – 14:04

7 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:06 – 07:26शुभ
काल07:26 – 08:45टालें
शुभ08:45 – 10:05शुभ
रोग10:05 – 11:25टालें
उद्वेग11:25 – 12:44टालें
चर12:44 – 14:04सामान्य
लाभ14:04 – 15:24शुभ
अमृत15:24 – 16:43शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर16:43 – 18:24सामान्य
रोग18:24 – 20:04टालें
काल20:04 – 21:45टालें
लाभ21:45 – 23:25शुभ
उद्वेग23:25 – 01:05टालें
शुभ01:05 – 02:46शुभ
अमृत02:46 – 04:26शुभ
चर04:26 – 06:07सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:0606:59दिन
शनि06:5907:52दिन
गुरु07:5208:45दिन
मंगल08:4509:38दिन
सूर्य09:3810:32दिन
शुक्र10:3211:25दिन
बुध11:2512:18दिन
चंद्र12:1813:11दिन
शनि13:1114:04दिन
गुरु14:0414:57दिन
मंगल14:5715:50दिन
सूर्य15:5016:43दिन
शुक्र16:4317:50रात
बुध17:5018:57रात
चंद्र18:5720:04रात
शनि20:0421:11रात
गुरु21:1122:18रात
मंगल22:1823:25रात
सूर्य23:2500:32रात
शुक्र00:3201:39रात
बुध01:3902:46रात
चंद्र02:4603:53रात
शनि03:5305:00रात
गुरु05:0006:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
13 दिस॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2026धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
20 दिस॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
27 दिस॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2333° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।