22 दिसंबर 2026 को दोहा का पंचांग

मंगलवार, 22 दिसंबर 2026, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

मंगलवार, 22 दिसंबर 2026 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (11:54 तक), नक्षत्र कृत्तिका (08:15 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:15 पर और सूर्यास्त 16:49 पर है। राहुकाल 14:10 से 15:30 तक है।

दिन और रात
दिन 06:15 – 16:49
रात 06:15 तक
तिथि
त्रयोदशी, 11:54 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
रोहिणी, 05:26 तक
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 दिसंबर 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 11:54 तक
शुक्ल चतुर्दशी 08:17, 23 दिस॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 05:26, 23 दिस॰ तक
मृगशिरा 02:23, 24 दिस॰ तक
योग
साध्य 19:02 तक
शुभ 14:45, 23 दिस॰ तक
करण
तैतिल 11:54 तक
गर 22:08 तक
वणिज 08:17, 23 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:15
सूर्यास्त
16:49
चंद्रोदय
14:59
चंद्रास्त
04:16
दिनमान
10h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:27 – 05:21
अभिजीत मुहूर्त
11:11 – 11:53

अशुभ समय

राहुकाल
14:10 – 15:30
यमगंड
08:53 – 10:13
गुलिक काल
11:32 – 12:51

22 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:15 – 07:34टालें
उद्वेग07:34 – 08:53टालें
चर08:53 – 10:13सामान्य
लाभ10:13 – 11:32शुभ
अमृत11:32 – 12:51शुभ
काल12:51 – 14:10टालें
शुभ14:10 – 15:30शुभ
रोग15:30 – 16:49टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल16:49 – 18:30टालें
लाभ18:30 – 20:10शुभ
उद्वेग20:10 – 21:51टालें
शुभ21:51 – 23:32शुभ
अमृत23:32 – 01:13शुभ
चर01:13 – 02:54सामान्य
रोग02:54 – 04:35टालें
काल04:35 – 06:15टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:1507:08दिन
सूर्य07:0808:01दिन
शुक्र08:0108:53दिन
बुध08:5309:46दिन
चंद्र09:4610:39दिन
शनि10:3911:32दिन
गुरु11:3212:25दिन
मंगल12:2513:18दिन
सूर्य13:1814:10दिन
शुक्र14:1015:03दिन
बुध15:0315:56दिन
चंद्र15:5616:49दिन
शनि16:4917:56रात
गुरु17:5619:03रात
मंगल19:0320:10रात
सूर्य20:1021:18रात
शुक्र21:1822:25रात
बुध22:2523:32रात
चंद्र23:3200:39रात
शनि00:3901:47रात
गुरु01:4702:54रात
मंगल02:5404:01रात
सूर्य04:0105:08रात
शुक्र05:0806:15रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
27 दिस॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
12 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जन॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2338° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।