27 फ़रवरी 2027 को दोहा का पंचांग

शनिवार, 27 फ़रवरी 2027, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

शनिवार, 27 फ़रवरी 2027 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (19:25 तक), नक्षत्र विशाखा (09:10 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:59 पर और सूर्यास्त 17:34 पर है। राहुकाल 08:52 से 10:19 तक है।

दिन और रात
दिन 05:59 – 17:34
रात 05:58 तक
तिथि
सप्तमी, 19:25 तक
अष्टमी
नक्षत्र
विशाखा, 09:10 तक
अनुराधा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 फ़रवरी 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 19:25 तक
कृष्ण अष्टमी 21:16, 28 फ़र॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 09:10 तक
अनुराधा 11:17, 28 फ़र॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 19:38 तक
हर्षण 19:58, 28 फ़र॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 06:43 तक
बव 19:25 तक
बालव 08:16, 28 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:59
सूर्यास्त
17:34
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
09:52
दिनमान
11h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:19 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:23 – 12:09

अशुभ समय

राहुकाल
08:52 – 10:19
यमगंड
13:13 – 14:40
गुलिक काल
05:59 – 07:25

27 फ़रवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:59 – 07:25टालें
शुभ07:25 – 08:52शुभ
रोग08:52 – 10:19टालें
उद्वेग10:19 – 11:46टालें
चर11:46 – 13:13सामान्य
लाभ13:13 – 14:40शुभ
अमृत14:40 – 16:07शुभ
काल16:07 – 17:34टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:34 – 19:07शुभ
उद्वेग19:07 – 20:40टालें
शुभ20:40 – 22:13शुभ
अमृत22:13 – 23:46शुभ
चर23:46 – 01:19सामान्य
रोग01:19 – 02:52टालें
काल02:52 – 04:25टालें
लाभ04:25 – 05:58शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:5906:57दिन
गुरु06:5707:54दिन
मंगल07:5408:52दिन
सूर्य08:5209:50दिन
शुक्र09:5010:48दिन
बुध10:4811:46दिन
चंद्र11:4612:44दिन
शनि12:4413:42दिन
गुरु13:4214:40दिन
मंगल14:4015:38दिन
सूर्य15:3816:36दिन
शुक्र16:3617:34दिन
बुध17:3418:36रात
चंद्र18:3619:38रात
शनि19:3820:40रात
गुरु20:4021:42रात
मंगल21:4222:44रात
सूर्य22:4423:46रात
शुक्र23:4600:48रात
बुध00:4801:50रात
चंद्र01:5002:52रात
शनि02:5203:54रात
गुरु03:5404:56रात
मंगल04:5605:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
28 फ़र॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 मार्च 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 मार्च 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 मार्च 2027फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
12 मार्च 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 मार्च 2027मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 मार्च 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 मार्च 2027फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
26 मार्च 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2364° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।