1 अक्टूबर 2027 को दोहा का पंचांग

शुक्रवार, 1 अक्टूबर 2027, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

शुक्रवार, 1 अक्टूबर 2027 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (01:03, 2 अक्टू॰ तक), नक्षत्र चित्रा (22:19 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 05:25 पर और सूर्यास्त 17:21 पर है। राहुकाल 09:54 से 11:23 तक है।

दिन और रात
दिन 05:25 – 17:21
रात 05:26 तक
तिथि
द्वितीया, 01:03 तक
तृतीया
नक्षत्र
चित्रा, 22:19 तक
स्वाति
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 01:03, 2 अक्टू॰ तक
शुक्ल तृतीया 23:39, 2 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 22:19 तक
स्वाति 21:33, 2 अक्टू॰ तक
योग
इंद्र 15:41 तक
वैधृतिअशुभ 13:11, 2 अक्टू॰ तक
करण
बालव 14:00 तक
कौलव 01:03, 2 अक्टू॰ तक
तैतिल 12:16, 2 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 10:56 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:25
सूर्यास्त
17:21
चंद्रोदय
06:33
चंद्रास्त
18:00
दिनमान
11h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:49 – 04:37
अभिजीत मुहूर्त
10:59 – 11:47

अशुभ समय

राहुकाल
09:54 – 11:23
यमगंड
14:22 – 15:51
गुलिक काल
06:55 – 08:24

1 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:25 – 06:55सामान्य
लाभ06:55 – 08:24शुभ
अमृत08:24 – 09:54शुभ
काल09:54 – 11:23टालें
शुभ11:23 – 12:52शुभ
रोग12:52 – 14:22टालें
उद्वेग14:22 – 15:51टालें
चर15:51 – 17:21सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:21 – 18:51टालें
काल18:51 – 20:22टालें
लाभ20:22 – 21:53शुभ
उद्वेग21:53 – 23:23टालें
शुभ23:23 – 00:54शुभ
अमृत00:54 – 02:24शुभ
चर02:24 – 03:55सामान्य
रोग03:55 – 05:26टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:2506:25दिन
बुध06:2507:25दिन
चंद्र07:2508:24दिन
शनि08:2409:24दिन
गुरु09:2410:23दिन
मंगल10:2311:23दिन
सूर्य11:2312:23दिन
शुक्र12:2313:22दिन
बुध13:2214:22दिन
चंद्र14:2215:21दिन
शनि15:2116:21दिन
गुरु16:2117:21दिन
मंगल17:2118:21रात
सूर्य18:2119:21रात
शुक्र19:2120:22रात
बुध20:2221:22रात
चंद्र21:2222:23रात
शनि22:2323:23रात
गुरु23:2300:24रात
मंगल00:2401:24रात
सूर्य01:2402:24रात
शुक्र02:2403:25रात
बुध03:2504:25रात
चंद्र04:2505:26रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
17 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2447° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।